नाभा जेल कांड में हुआ बड़ा खुलासा, अफसरों की लापरवाही से आरोपियों का लश्कर-ए-तैयबा नेटवर्क से था संबंध



Nabha jail-break

पंजाब की हाई सिक्योरिटी जेल नाभा और पटियाला से लश्कर-ए-तैयबा का नेटवर्क चल रहा था। यहां बंद लश्कर के दो आतंकी शकरउल्ला और शाहिद इकबाल जेल अफसरों की लापरवाही से खुलेआम मोबाइल के जरिए राजस्थान के लोगों से संपर्क बनाते और उनका मोबाइल पर ही पाक में बैठे लश्कर कमांडर विक्की उर्फ वलीद भाई से संपर्क करवा लश्कर में भर्ती करवाते थे। यही नहीं, उन्हें पाक में भेज आतंक की ट्रेनिंग देने के लिए कुवैत और स्पेन के रास्ते फंडिंग भी करवाते थे।

6 दिसंबर को कोर्ट ने सुनाया अपना अहम फैंसला

दिल्ली में खुफिया एजेंसी ने जब राजस्थान से पाक में हो रही फोनकॉल को ट्रेस किया तो बीकानेर और जोधपुर की जेल में बंद पाक आतंकियों का कनेक्शन नाभा और पटियाला जेल से जुड़ा। 2010 में उजागर इस केस पर 6 साल जयपुर अदालत में चले ट्रायल के बाद 6 दिसंबर को कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि नाभा और पटियाला जेलों के अफसरों की लापरवाही और दुराचरण से ही देश की जान माल की क्षति करने के लिए आतंकी एक्टिव हुए, इसलिए देश की सुरक्षा को क्षति का मामला होने से यह माफी योग्य नहीं। कोर्ट ने डीजीपी पंजाब को उस समय के जेल अफसरों के खिलाफ जांच कर उसकी रिपोर्ट अदालत में पेश करने के निर्देश दिए हैं। उधर, पंजाब के एडीजीपी जेल इकबाल प्रीत सिंह सहोता ने इस पर कहा है कि उनके पास अभी ऑर्डर की कॉपी नहीं आई। मगर वह पंजाब की जेलों को फोर जी जैमर से कनेक्ट करने का प्रस्ताव भेज चुके हैं, जिसमें अमृतसर जेल भी शामिल है।

अफीम तस्करी में बंद कैदी के जरिए लश्कर आतंकियों ने राजस्थान में बनाया था नेटवर्क

राजस्थान के जिला झालाबाड़ में मदरसे में चपड़ासी के तौर पर काम करने वाला काबिल खां अफीम तस्करी में 2010 में अमृतसर की जेल में बंद था। यहीं पर बंद लश्कर के आतंकी शाहिद इकबाल से उसकी मुलाकात हुई और उसने नाभा जेल में बंद दूसरे लश्कर आतंकी शकरउल्ला से उसकी बातचीत करवाई। कुछ देर बार काबिल खां जेल से रिहा होकर राजस्थान झालाबाड़ चला गया। वहां जाकर उसने मदरसे में पढ़ाने वाले हाफिज अब्दुल मजीद को अपने साथ मिलाया और उसकी नाभा जेल में शिफ्ट हो चुके शकरउल्लाह और शाहिद इकबाल से बात करवाई। इन दोनों आतंकियों ने उसे पाक में बैठे लश्कर कमांडर वलीद भाई से संपर्क करवा ट्रेनिंग के लिए पाक भेजने को तैयार किया। इस तरह शकरउल्लाह और शाहिद इकबाल नाभा और पटियाला जेल में बैठे 4 मोबाइल सिम का इस्तेमाल कर राजस्थान में लश्कर का नेटवर्क खड़ा करते रहे और उनके जरिए राजस्थान के लोग पाक में लश्कर के संपर्क में आ गए। मगर उनकी पाक में फोनकॉल बढ़ी तो यह खुफिया एजेंसी के रडार पर आ गए। इसके बाद एटीएस ने इनके फोन नंबर रिकार्ड किए तो दशहरे को मोहरम में बदलने और प्रवीण भाई तोगड़िया और बाला साहिब ठाकरे की फिल्म बनाने जैसे कोर्ड वर्ल्ड पकड़े गए। इससे यह काबू में आ गए।

6 साल बाद भी वही हालात, पहले लश्कर तो अब खालिस्तान लिब्रेशन का नाभा से नेटवर्क

जयपुर कोर्ट ने भले ही अब लश्कर के आतंकियों को सजा सुनाई है। मगर 2010 में इनके पकड़े जाने से ही इस बात का खुलासा हो गया था कि आतंकियों को रखने के लिए बनाई हाई सिक्योरिटी नाभा जेल से ही इनका नेटवर्क चलता है। मगर 6 साल बाद भी नाभा जेल के हालात वैसे ही हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि तब लश्कर का नेटवर्क यहां से चलता था अब खालिस्तान लिब्रेशन फोर्स का। 27 नवंबर 2016 को खालिस्तान लिब्रेशन फोर्स के चीफ आतंकी हरमिंदर सिंह मिंटू ने गैंगस्टरों की मदद से जेल ब्रेक करवा वहां से भागा, जिसे बाद में दिल्ली से पकड़ा गया। इसके बाद डेढ़ साल से पंजाब में हुई 9 टार्गेट किलिंग के केस को जब सॉल्व किया गया तो 6 नवंबर 2017 को खुलासा हुआ कि इसके पीछे भी खालिस्तान लिब्रेशन फोर्स थी। नाभा जेल में बंद आतंकी हरमिंदर मिंटू और गैंगस्टर धरमिंदर गुगनी की मदद से ही इंगलैंड में बैठे केएलएफ के हरमीत पीएचडी और गुशरणबीर ने जगतार जोहल, जिम्मी, रमनजीत और शेरा की मदद से ये शड़्यंत्र रचा था। इसके बाद कुछ दिन पहले फिर नाभा जेल ब्रेक कर भागे गैंगस्टर कुलप्रीत नीटा दयौल की बैरक से मोबाइल फोन मिला। इससे साफ है कि नाभा जेल आज भी आपराधियों की एशगाह है।

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