पंजाब में ‘कैमिकल टैरेरिज्म’,56 पाक तस्कर चला रहे नैटवर्क


पंजाब में नशे की ओवरडोज से युवाओं की मौत का सिलसिला बदस्तूर जारी है। जून माह में 2 दर्जन से अधिक युवकों की मौत हो चुकी है। जुलाई माह में भी इसका ग्राफ बढ़ता जा रहा है। खुफिया एजैंसियों ने इसके पीछे आई.एस.आई. की गहरी साजिश बताई है और इसे ‘कैमिकल टैरेरिज्म’ का नाम दिय है। आई.एस.आई. इसे कैमिकल वैपन के रूप में इस्तेमाल कर रही है। पाकिस्तान में बैठे 56 बड़े पाकिस्तानी तस्कर सीमा पर सक्रिय हैं। मौत के यह सौदागर पहले अफगानिस्तान सीमा पर सक्रिय थे, लेकिन अब इनको आई.एस.आई. ने पंजाब की सीमा पर सक्रिय किया है। नारोवाल से लेकर कसूर और लाहौर तक के बड़े तस्कर अब पंजाब की नस्ल को खराब करने में जुटे हैं।

चिट्टा एकाएक कैसे हुआ जानलेवा
सूत्रों के मुताबिक पिछले कुछ समय से सीमा पार से जो सप्लाई आ रही है वह मिलावटी होने के कारण उसकी कीमत कम है। मगर असर तेज है। सीमावर्ती इलाकों में जो मौतें हुई हैं, उनमें 300 रुपए में मिलने वाली चिट्टे की पुडिया की बात सामने आई है। खुफिया एजैंसियों के मुताबिक इस बात की जांच की जा रही है कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में हैरोइन की कीमत बहुत ज्यादा है तो फिर 300 रुपए की पुडिया में नौजवानों को बेचा क्या जा रहा है।

फैंटानाइल को चीनी नमक नाम दिया तस्करों ने
सूत्रों का कहना है कि जांच एजैंसियों को यह भी पता चला है कि ऐसे फोन टैप हुए हैं जिनमें यह कहा गया है कि नमक में ‘चीनी नमक’ मिलिया होएया है ते ज्यादा असर करूगा। इसका मतलब फैंटानाइल से लिया जा रहा है, जिसे तस्कर अपनी भाषा मे चीनी नमक कह रहे हैं। सूत्रों का कहना है यह बात भी सामने आई है कि कुछ तस्कर यहां पर भी इसमें मिलावट कर रहे हैं लेकिन ज्यादातर माल में बाहर से ही मिलावट की जा रही है।

पुलिस ही नहीं दूसरे विभागों में भी हैं काली भेड़ें
नशे से युवाओं की हो रही मौतों को मुख्यमंत्री कै. अमरेन्द्र सिंह ने गंभीरता से लेते हुए नशा तस्करों को फांसी देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। सूत्रों के मुताबिक अधिकारियों की घंटों चली बातचीत में यह बात सामने आई है कि नशे के इस काले कारोबार के लिए अकेले पुलिस विभाग में ही कुछ काली भेड़ें जिम्मेदार नहीं हैं। इसके लिए कुछ दूसरे विभागों में काली भेड़ें शामिल हैं और लोग सारा कसूर पुलिस में निकालते हैं।

हर जिले में मौजूद काली भेड़ें, एक्शन प्लान तैयार, कुछ नेता भी राडार पर
मुख्यमंत्री के एक्शन मूड को भांपते हुए पुलिस प्रशासन और खुफिया विभाग ने हरेक जिले में काली भेड़ों जो मौत के इस खेल में काम कर रही हैं, की सूचियां बनानी शुरू कर दी हैं। सूत्रों के मुताबिक लगभग हरेक जिले में ऐसी काली भेड़ें मौजूद हैं। वहीं इन काली भेड़ों को संरक्षण देने वाले कुछ नेता भी पुलिस और खुफिया विभाग के राडार पर हैं, जिन पर आने वाले दिनों में बड़े एक्शन की तैयारी चल रही है। फैंटानाइल सबसे ज्यादा चीन में तैयार होता है और इसकी सप्लाई अमरीका में सबसे ज्यादा होती थी । मौतों का ग्राफ बढने के कारण कुछ साल पहले अमरीका इसे प्रतिबंधित कर चुका है।

6 साल में नशे से पंजाब में 413, जबकि हरियाणा में 448 मौतें

अभी हाल ही में आई एक रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा में साढ़े 4 लाख से अधिक लोग नशे की जकड़ में हैं। कोढ़ में खाज यह है कि नशे पर अंकुश लगाने के लिए महज 8 ही सरकारी नशा मुक्ति केंद्र हैं और इनमें भी पर्याप्त सुविधाएं व संसाधन नहीं हैं। पंजाब व हरियाणा में सरकारी आंकड़ों के अनुसार 7 साल में 1100 लोगों की नशे की ओवरडोज से मौत हो चुकी है। राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो के अनुसार साल 2010 से लेकर 2015 तक हरियाणा में 448, जबकि पंजाब में 413 लोग काल के मुंह में समा चुके हैं। खास बात यह है कि नशे से होने वाली मौतों का यह केवल सरकारी आंकड़ा है। नशे से होने वाली मौत के 70 प्रतिशत से अधिक मामले पुलिस के पास नहीं पहुंचते हैं। बिना पुलिस को सूचना दिए ही संस्कार कर दिया जाता है।

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