शोधकर्ताओं ने किया नई तकनीक का आविष्कार – किडनी खराब होने पर अब नहीं ढूंढना पड़ेगा डोनर


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जापान में शोधकर्ताओं के एक दल ने कुछ डोनर स्टेम सेल्स (मूल कोशिकाओं) से चूहों में गुर्दे का विकास किया है, जिसके बाद इस बात की उम्मीद जगी है कि इस तरह गुर्दे का विकास किया जा सकता है, जिसे दुनिया में गुर्दा दाताओं (Kidney donors) की कमी की समस्या से निजात मिल सकती है. अगले पखवाड़े नेचर कम्यूनिकेशन जर्नल में प्रकाशित होने वाले इस शोध के नतीजों के अनुसार, विकसित किए गए नए गुर्दे काम करते हुए प्रतीत होते हैं.

गुर्दा रोग से पीड़ित लोगों को मिलेगी मदद

बशर्ते इस संकल्पना की वैधता का प्रमाण मिले कि इसका इस्तेमाल पशुओं के भीतर मानव गुर्दे को विकसित करने में किया जा सकता है. गुर्दा रोग से पीड़ित जो मरीज अंतिम अवस्था में हैं, उनके लिए गुर्दा प्रत्यारोपण ही एकमात्र उम्मीद है, जिससे वे अपनी शेष जिंदगी जी सकते हैं. लेकिन अनेक मरीज गुर्दा प्रत्यारोपण (Kidney donors) नहीं करवा पाते हैं, क्योंकि दुनिया में गुर्दा दानकर्ताओं का काफी अभाव है.

जापान में तैयार हो रही है तकनीक

शोधकर्ता मानव शरीर के बाहर स्वस्थ अंग विकसित करने की विधि तैयार करने की दिशा में भी काम कर रहे हैं. इसी विधि से चूहे का अग्नाशय तैयार करने में उनको आशावादी परिणाम मिले हैं. जापान के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर फिजियोलोजिकल साइंसेज के शोधकर्ताओं ने इस बात की जांच करने का फैसला किया है कि क्या इस विधि का इस्तेमाल मानव गुर्दा तैयार करने में किया जा सकता है. विश्वविद्यालय के मासूमी हिराबायाशी ने कहा, “हमारे नतीजों से इस बात की पुष्टि होती है कि गुर्दा बनाने में इंटरस्पेशिफिक ब्लास्टोसिस्ट कंप्लीमेंटेशन एक व्यावहारिक विधि है.”

इस वजह से होती है किडनी खराब

  • पेशाब आने पर करने न जाना
  • रोज 7-8 गिलास से कम पानी पीना
  • बहुत ज्यादा नमक खाना
  • हाई बीपी के इलाज में लापरवाही बरतना
  • शुगर के इलाज में कोताही करना
  • बहुत ज्यादा मीट खाना
  • ज्यादा मात्रा में पेनकिलर लेना
  • बहुत ज्यादा शराब पीना
  • पर्याप्त आराम न करना
  •  सॉफ्ट ड्रिंक्स और सोडा ज्यादा लेना
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