40 साल पहले अपना सबकुछ बेच कर साइकिल से अपने प्यार से मिलने स्वीडन चला गया था ये भारतीय


आज से कोई 40 साल पहले भारत की राजधानी दिल्ली में एक भारतीय कलाकार और एक स्वीडिश लड़की की एक प्रेमकहानी शुरू हुई थी. एक ऐसी प्रेमकहानी, जिसके अंजाम तक पहुँचने के दूर दूर तक भी कोई आसार नहीं थे, क्योंकि लड़का एक बेहद गरीब सड़क पर बैठकर लोगों के चित्र बनाने वाला स्ट्रीट आर्टिस्ट और लड़की एक विदेशी पर्यटक. पर आपको आश्चर्य होगा कि प्रेमकहानी न सिर्फ पूरी हुई बल्कि आज भी जारी है. ये कहानी है प्रद्युम्न कुमार महानन्दिया और स्वीडन की रहने वाली शेर्लोट की.

प्रद्युम्न कुमार का जन्म उडीसा के अंगुल जिलें के एक गाँव में एक दलित परिवार में हुआ था. प्रारंभिक शिक्षा उनकी उडीसा में ही हुई परन्तु उनकी कला में रूचि थी इसलिए वे आगे की पढ़ाई के लिए 1971 में कॉलेज ऑफ़ आर्ट्स दिल्ली में आ गए. उनके जन्म के बाद एक ज्योतिषी ने कहा था कि इस लड़के की शादी किसी दूर देश में रहने वाली लड़की से होगी जो संगीतज्ञ होगी और एक जंगल की मालकिन होगी.

पढ़ाई के दौरान उन्होंने श्रीमती इंदिरा गाँधी का एक चित्र बनाया जिसकी बहुत प्रशंसा हुई और इस वजह से उन्हें कनाट प्लेस पर बैठने की एक जगह मिल गई जहाँ बैठकर वे लोगों के चित्र बनाने लगे. यही वो जगह थी जहां उन्हें शेर्लोट मिली | दिसम्बर 17, 1975 का दिन था, जब 19 साल की स्वीडिश लड़की शेर्लोट उनके पास अपना चित्र बनवाने आईं. न जाने क्यों, शेर्लोट को देखते ही उन्हें ज्योतिषी की भविष्यवाणी याद आ गई. शेर्लोट को देखते ही उन्हें न जाने क्या हो गया कि उस दिन वे उनका चित्र नहीं बना पाए और उन्हें दूसरे दिन आने को कह दिया.

दूसरे दिन जब शेर्लोट आईं तो बातों बातों में पता चला कि वे एक जंगल की मालकिन हैं और बांसुरी वादक हैं. अब तो प्रद्युम्न को ज्योतिष पर पूरा भरोसा हो गया. तीसरे दिन उन्होंने शेर्लोट से कह दिया, “तुम्ही मेरी पत्नी बनोगी. ईश्वर ने हमारा मिलना तय कर रखा है. किसी भी दूसरी लड़की की तरह शेर्लोट ने इस बात को ज्यादा गंभीरता से न लेते हुए हंस कर उड़ा दिया. हालांकि प्रद्युम्न उन्हें रोचक आदमी लगे और वे स्वीडन वापस जाने के पहले करीब 2-3 सप्ताह तक उनसे मेल मुलाक़ात करती रहीं.

और वो दिन भी आया जब शेर्लोट अपने देश वापस चली गईं. कायदे से किस्से को यहीं ख़त्म हो जाना चाहिए था. पर नहीं, पिक्चर तो अभी शुरू हुई थी. करीब डेढ़ साल बाद प्रद्युम्न ने अपना सबकुछ बेच डाला और एक सेकंड हैण्ड साइकिल खरीदी. इस साइकिल पर बैठकर वे चल दिए अपने प्यार से मिलने … 6000 किलोमीटर दूर, स्वीडन. बहुत थोड़े से पैसे, कुछ सहृदय लोगों की मदद और अपने अथाह विश्वास के सहारे आखिर वे स्वीडन पहुँचने में कामयाब रहे. शेर्लोट ने जब उन्हें देखा तो विश्वास नहीं हुआ. फिर दोनों ने शादी कर ली. आज 40 साल से ऊपर हो गए हैं उनकी शादी को. उनके दो बच्चे भी हैं.

आज प्रद्युम्न को स्वीडन में डॉ. पी. के. महानन्दिया के नाम से जाना जाता है. वे वहाँ के एक जाने माने आर्टिस्ट हैं और स्वीडिश सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग में सलाहकार हैं. आप उनके बारे में और विकीपीडिया पर पढ़ सकते हैं.

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