कैसे होगा लुधियाना प्रदूषण मुक्त, अभी तक नहीं लग पाए CETP के बर्बाद हुए 40 करोड़


लुधियाना – प्रदूषण को लेकर पंजाब सरकार की गंभीरता केवल कागजों में ही सीमित है। लुधियाना इंडस्ट्रीयल जोन होने के कारण विश्व भर में सबसे ज्यादा प्रदूषित होने वाला शहर प्रचलित हो रहा है। लेकिन कोई भी सरकार या उसके सरकारी अदारे पिछले 10 सालों में प्रदूषण की असली समस्या को नहीं ढूंढ पाए हैं। हर संबंधित विभाग अपने बचाव के लिए दूसरे विभाग को जिम्मेदार ठहरा देता है और असली गाज इंडस्ट्री पर आकर गिर रही है। डाइंग इंडस्ट्री जिसमें सबसे ज्यादा पानी का इस्तेमाल होता है, उसके लिए पिछले 10 सालों से कामन एफुलैंट ट्रीटमैंट प्लांट (सी.ई.टी.पी.) लगाने की योजना पंजाब सरकार की ओर से पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने दी। इस पर काम भी शुरू हुआ और इंडस्ट्री का 40 करोड़ भी लग गया। लेकिन आज यह प्लांट है कहां किसी को कुछ नहीं पता। लुधियाना में डाइंग इंडस्ट्री के लिए बहादुरके रोड, ताजपुर रोड और फोकल प्वाइंट में 155 करोड़ रुपए की लागत से 3 सी.ई.टी.पी. लगने थे।

इस कुल प्रोजैक्ट में पंजाब सरकार और केंद्र सरकार ने सबिसडी भी देनी थी और कुछ पैसा इंडस्ट्री ने अपनी ओर से लगाना था, जो लग चुका है। सवाल यह है कि जब डाइंग यूनिटों ने अपनी फैक्टरियों में निजी एफुलैंट ट्रीटमैंट प्लांट (ई.टी.पी.) लगा रखे हैं तो सी.ई.टी.पी. की जरूरत क्यों पड़ी, क्या डाइंग इंडस्ट्री अपने निजी ई.टी.पी. नहीं चला रही है जिस कारण बुड्ढे नाले के जरिए गंदा पानी सतलुज दरिया में जा रहा है। इस सवाल पर डाइंग इंडस्ट्री कहती है कि उसने लाखों रुपए लगाकर ई.टी.पी. लगाए है और उसके जरिए पानी साफ करके बुड्ढे नाले में डालते हैं जबकि प्रदूषण बोर्ड कहता है कि डाइंग इंडस्ट्री बोर्ड के पैरामीटर के मुताबिक पानी साफ नहीं कर रही। परंतु इस बात का जवाब किसी के पास नहीं है कि अगर ई.टी.पी. सही चल रहे हैं तो इंडस्ट्री सी.ई.टी.पी. की सदस्य क्यों बन रही है।

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