स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह की 111वीं जयंती पर जाने उनसे जुड़ी बात, फांसी नहीं इस तरह होना चाहते थे शहीद


111th Birth Anniversary of Freedom Fighter Bhagat Singh

आज भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह की 111वीं जयंती है। भगत सिंह आजादी के ऐसे नायक रहे, जिनके ऊपर सबसे ज़्यादा फिल्में बनी हैं। आजादी के लिए उनकी लड़ाई और कठोर संघर्ष, शादी के लिए घर से भाग जाने के किस्से लगभग सभी ने सुने होंगे, लेकिन आज हम आपको उनकी ज़िंदगी से जुड़ा वह किस्सा बताएंगे, जब उन्हें फांसी की सज़ा सुनाई गई। क्या आप जानते हैं कि भगत सिंह ने अपने लिए कैसी शहादत के सपने देखे थे

भगत सिंह सैनिकों जैसी शहादत चाहते थे। वह फांसी की बजाय सीने पर गोली खाकर वीरगति को प्राप्त होना चाहते थे। यह बात उनके लिखे एक पत्र से जाहिर होती है। उन्होंने 20 मार्च 1931 को पंजाब के तत्कालीन गवर्नर से मांग की थी कि उन्हें युद्धबंदी माना जाए और फांसी पर लटकाने की बजाय गोली से उड़ा दिया जाए, लेकिन ब्रिटिश सरकार ने उनकी यह मांग नहीं मानी।

भगत लाहौर के नैशनल कॉलेज में पढ़ते थे। 5 फुट, 10 इंच के भगत सिंह को नाटकों में अभिनय करने का बहुत शौक था। साथ ही वह फिल्में देखने के भी शौकीन थे। अंग्रेज अफसर जॉन सॉन्डर्स को मारने से पहले भी उन्होंने ‘अंकल टॉम्स केबिन’ फिल्म देखी थी। यह अमेरिकी लेखक हैरिएट बीचर स्टो के गुलामी के खिलाफ लिखे गए एक नॉवेल पर आधारित थी।

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