ATM का इस्तेमाल करने वाले हो जायें सावधान, आपके बैंक खाते में इस तरह से लग सकती है सेंध


बैंकों की लापरवाही से देश में जितनी तेजी से डेबिट, क्रेडिट व कैश कार्ड धारकों की संख्या बढ़ रही है। उतनी ही तेजी से बैंक खातों से रुपये निकलने के मामले भी बढ़ रहे हैं। ताजा मामला गुरुग्राम का है जहां हैकरों ने एचडीएफसी के एक एटीएम बूथ से 100 से ज्यादा ग्राहकों का डाटा चोरी कर उनके बैंक खाते से कई बार में 15 लाख रुपये निकाल लिए। गुरुग्राम पुलिस और एचडीएफसी बैंक को जब लगातार खाता धारकों की शिकायतें मिलने लगीं तो उन्होंने मामले में जांच की। जांच में पता चला कि हैकिंग का शिकार होने वाले सभी उपभोक्ताओं ने मार्च व अप्रैल महीने में गुरुग्राम के सेक्टर-45 स्थित एचडीएफसी बैंक के एटीएम से ट्रांजेक्शन किया था। ऐसे में बैंक और गुरुग्राम पुलिस की साइबर सेल को आशंका है कि सेक्टर-45 स्थित एटीएम से ही ग्राहकों का डाटा चोरी कर उनके खातों में सेंध लगाई गई है।

सीसीटीवी रिकॉर्डिंग से चल सकता है हैकर का पता

साइबर सेल के अनुसार बैंक से इन सभी तारीखों की एटीएम की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग मांगी गई है। सीसीटीवी रिकॉर्डिंग खंगालने से हैकर का पता चल सकता है। मामले में साइबर थाने में आईटी एक्ट और धोखे से खाते से रुपये चुराने की धाराओं में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। सीसीटीवी रिकॉर्डिंग खंगालने के बाद जांच आगे बढ़ेगी।

सीसीटीवी से चोरी करते हैं पिन

स्कीमर से डाटा चोरी करने के साथ ही हैकर को उपभोक्ता के डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड का चार अंकों का पिन नंबर भी पता होना चाहिए। तभी वह कार्ड से ट्रांजेक्शन कर सकता है। इसके लिए हैकर बूथ के अंदर एक हिडेन कैमरा लगाते हैं जो मशीन के कीपैड पर फोकस करता है। यूजर द्वारा कीपैड पर पिन डालते ही वह हिडेन कैमरे में रिकार्ड हो जाता है।

प्रतिबंध के बावजूद बिकता है स्कीमर

कार्ड क्लोन के लिए इस्तेमाल होने वाला स्कीमर प्रतिबंधित है। बावजूद ये दिल्ली एनसीआर के कुछ प्रमुख आईटी मार्केट में चोरी-छिपे बिकता है। इसके अलावा बहुत ई-कॉमर्स वेबसाइट पर ऑनलाइन भी स्कीमर की बिक्री हो रही है। इस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की जरूरत है।

ऐसे तैयार होता है क्लोन कार्ड

स्कीमर से डाटा चोरी करने के बाद हैकर अपने लैपटॉप अथवा कंप्यूटर से डिवाइस को कनेक्ट कर डाटा सेव कर लेते हैं। इसके बाद अगर हैकर को कार्ड स्वैप कर शॉपिंग या कोई और खर्च करना है तो वह मार्केट से डेबिट कार्ड के आकार के ही खाली प्लास्टिक कार्ड खरीदेगा। इसके बाद उस कार्ड पर एक विशेष मशीन के जरिए चोरी किए गए डाटा की मैगनेटिक स्ट्रीप बनाकर पेस्ट कर देगा। अगर हैकर को ऑनलाइन शॉपिंग या ट्रांजेक्शन करना है तो उसे कार्ड क्लोन करने की भी जरूरत नहीं है। हैकर चोरी किए गए डाटा व पिन के जरिए ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कर सकता है।

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