भारी वर्षा से देश के कई राज्यों में बाढ़ जैसी स्थिति, मैडीकल कालेज के आई.सी.यू. में घुसा पानी तैर रही मछलियां


मानसून आने के बाद से जारी बारिश से कई राज्य बाढ़ का सामना कर रहे हैं। पटना से लेकर दिल्ली तक बाढ़ जैसा माहौल है। गत दिवस पांच गुना पानी बढ़ने से दिल्ली में यमुना खतरे के निशान को भी पार कर गई, जिसके चलते पुराने यमुना पुल पर यातायात बंद कर दिया गया है। उधर हरियाणा ने पहली बार हथिनीकुंड बैराज के सभी 18 गेट खोल दिए हैं, जिससे हरियाणा के कई गांव पानी में डूब गए हैं और दिल्ली में भी बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। यमुना नदी का जलस्तर इस समय खतरे के निशान से 67 सैं.मी. ऊपर पहुंच गया है। शनिवार शाम तक जहां यमुना का वाटर लैवल 204.10 मीटर था वहीं रविवार सुबह यह बढ़कर 205.50 मीटर हो गया है। बाढ़ नियंत्रण विभाग और दिल्ली आपदा प्रबंधन की टीमों को अलर्ट कर दिया गया है। यह लगातार बढ़ रहा है। वहीं हालात का जायजा लेने दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने अक्षरधाम ऐर पांडव नगर के पास निचले क्षेत्रों का दौरा किया। उधर बिहार के बेगूसराय और कैमूर जिलों में बारिश के दौरान आसमानी बिजली की चपेट में आने से 3 बच्चों सहित 5 लोगों की मृत्य हो गई है।

केदारनाथ में आपदा जैसे हालात

विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम में गरुड़चट्टी को जोडऩे वाला पैदल पुल मंदाकिनी नदी के तेज बहाव में डूब गया है। केदारनाथ धाम में वर्ष 2013 की आपदा जैसे हालात पैदा हो गए हैं। पिछले 2 दिनों से केदारनाथ धाम में मंदाकिनी नदी विकराल रूप लेकर बह रही है जिससे केदारनाथ धाम में हालात अस्त-व्यस्त हो गए हैं। केदारनाथ धाम के गरुड़चट्टी में इन दिनों पुनर्निर्माण कार्य चल रहे हैं जिसके चलते नदी पार मजदूर व साधु-संत फंसे हुए हैं।

बिहार के नालंदा मैडीकल कालेज के आई.सी.यू. में घुसा पानी, बैड पर मरीज, नीचे मछलियां

बिहार के नालंदा मैडीकल कालेज से डराने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। यहां अस्पताल के आई.सी.यू. में बारिश का गंदा पानी घुस गया है। ऐसे में अस्पताल में इलाज करवा रहे मरीजों को अस्पताल से डर लगने लगा है। बद इंतजामी के लिए मशहूर पटना का यह अस्पताल 100 एकड़ में फैला है और इसमें 750 बैड हैं। पटना के दूसरे सबसे बड़े सरकारी अस्पताल नालंदा मैडीकल कालेज अस्पताल में घुटनों तक पानी भरा हुआ है, पानी में सब कुछ तैर रहा है और मरीज बैड पर लेटे हैं। यही नहीं, पानी में मछलियां भी तैर रही हैं। ऐसे में मरीजों को अस्पताल से ही खतरा लगने लगा है।

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