लुधियाना सतीश चंद्र धवन सरकारी कॉलेज में धूमधाम से सम्पन्न हुआ दीक्षांत समारोह


सतीश चंद्र धवन सरकारी कॉलेज, लुधियाना का दीक्षांत समारोह धूमधाम से सम्पन्न। समारोह के दीक्षांत संबोधन हेतु जम्मू एवं कश्मीर के माननीय राज्यपाल श्री एन. एन. वोहरा जी पधारे और पी. जी. कक्षा के 60% और उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले 350 विद्यार्थियों को डिग्री तथा विभिन्न क्षेत्रों में विशेष उपलब्धि पाने वाले 36 विद्यार्थियों को रोल ऑफ ऑनर प्रदान किये। महाविद्यालय की ओर से मुख्य अतिथि श्री वोहरा तथा विशिष्ट अतिथि श्री कुलदीप वैद (विधायक) का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. धर्म सिंह संधू ने समारोह में मुख्य अतिथि का परिचय करवाया और कहा कि आज महाविद्यालय के लिए गर्व का विषय है कि आज वह अपने विद्यार्थी का स्वागत मुख्य अतिथि के रूप में कर रहा है। उन्होंने बताया कि श्री वोहरा 1955-57 बैच के इसी महाविद्यालय के एम. ए. अंग्रेजी के विद्यार्थी रहे हैं। महाविद्यालय के सतलुज मैगजीन के छात्र-संपादक होने के साथ साथ विश्वविद्यालय में टॉप भी किया था। इसके पश्चात एक वर्ष इसी कॉलेज में अध्यापन किया तदोपरांत 1959 में भारतीय प्रशासनिक सेवा हेतु पंजाब कैडर से चयनित हुए। इसके बाद राज्य और केंद्र के विभिन्न पदों पर रहते हुए अपनी सेवाएं दीं। पोस्ट ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान गृह सचिव के रूप में उन्होंने महात्त्वपूर्ण भूमिका अदा की। प्राचार्य ने कहा कि रिटायरमेंट के पश्चात जहां एक तरफ लोग जीवन मे नई चुनौतियां लेने से घबराते हैं वहीं इसके विपरीत श्री वोहरा सन 1994 में IAS से सेवानिवृत्त होने के पश्चात 1997 में भारतीय प्रधानमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी नियुक्त किये गए तथा WHO जेनेवा के इंटरनेशनल सिविल सर्वेंट की जिम्मेदारी निभाई। देश के प्रति उनकी निष्ठा और समर्पण की भावना और उपलब्धियों को देखते हुए भारत सरकार द्वारा उन्हें 2007 में पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया और देश के 2 शीर्षस्थ विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें पीएच. डी. की मानद उपाधि प्रदान की गई। 2008 में जम्मू एवं कश्मीर के राज्यपाल की जिम्मेदारी दी गयी जहां वे पिछले 10 वर्षों से अपने सेवा दे रहे हैं।
इसके साथ ही प्राचार्य ने वर्ष 2017-18 की संक्षिप्त रिपोर्ट पेश की।

मुख्य अतिथि ने अपने कर- कमलों से सभी विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की तथा अपने संबोधन में कहा कि आज कॉलेज में दाखिल होते ही उनकी यादें ताज़ा हो गईं। ऑडिटोरियम में दाखिल होते ही उन्हें वो पल याद आ गया जब इसी ऑडिटोरियम में वे विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेने हेतु आते थे और आज फिर से उनके क्लासमेट भी मिले जिनसे यशसन मिलकर उनका हृदय रोमांचित हो गया। उन्होंने अपने शिक्षकों के प्रति विनम्र आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “उनकी बदौलत ही वे आज इस मुकाम पर पहुंचे हैं। भले ही उस समय शिक्षकों, पैसों और संसाधनों का अभाव था पर शिक्षा की गुणवत्ता में कहीं से भी समझौता नहों नज़र आता था। उस समय भी यहां के विद्यार्थी पढ़ाई, खेलादि क्षेत्रों में अव्वल ही आते थे। आज भी मुझे खुशी है कि महाविद्यालय के विद्यार्थी शिक्षा, खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों, एन. सी. सी. आदि क्षेत्रों में अपनी छाप छोड़ रहे हैं।” उन्होंने कहा कि एक समय मे यह कॉलेज लड़कों का था परंतु आज के दीक्षांत समारोह में लगभग 90% लड़कियों को देख कर ऐसा लग रहा है कि यह लड़कियों का कर्ज है। इस हेतु भी उन्होंने महाविद्यालय प्रशासन को बधाई दी कि स्त्री को समर्थ बनाने में उनका विशेष योगदान है।

विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज भारत बहुत तेज़ी से विश्व स्तर पर अपनी आर्थिक विकास को लेकर आगे बढ़ रहा है जिसमे युवाओं का विशेष योगदान है। उन्होंने कहा कि हम सब को अपने बारे में सोचते रहना चाहिए। चाहे कितनी भी मुश्किलों का सामना क्यों न करना पड़े, हमें कभी भी अपने नैतिक मूल्यों से समझौता नहीं करना चाहिए। यही मूल्य हमे मजबूती प्रदान करती है और विकट परिस्थिति में भी आगे बढ़ने की ओर प्रेरित करती है। इस अवसर पर कॉलेज कौंसिल ने उन्हें “जीवन पर्यंत सम्मान” से सम्मानित किया गया और स्मृति चिह्न प्रदान किया गया। समारोह के अंत मे विशिष्ट अतिथि श्री कुलदीप वैद ने मुख्य अतिथि तथा अन्य कॉलेज से आये प्रिंसिपल, गणमान्यजनों तथा इस महाविद्यालय के पूर्व प्रिंसिपल और प्राधापकों का धन्यवान किया कि उन्होंने यहां आकर कार्यक्रम की शोभा बधाई। दीक्षांत समारोह का अंत राष्ट्रगान के साथ हुआ।

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