राज्य सरकार चूहा मारने पर देगी पैसा, बेरोजगार युवकों को मिलेगा रोजगार


Anti Rat Campaign Commenced by BMC

मॉनसून की बारिश से मुंबई इन दिनों वॉटरलॉगिंग की समस्या से जूझ रही है. लेकिन, मुंबई महानगर पालिका के सामने इसके अलावा भी कई चुनौतियां है. इसमें एक चुनौती ऐसी है कि उसे अब अपने कर्मचारियों के अलावा बेरोजगार युवकों की मदद लेनी पड़ रही है. दरअसल, बारिश के बाद जमा होने वाले पानी से निकलने वाले चूहे अब बीएमसी के रडार पर हैं. ये चूहे हर साल मॉनसून के दौरान लेप्टोस्पायरोसिस नाम का संक्रामण फैलाते हैं. चूहों से फैलने वाले इस संक्रमण को आम भाषा में दिमागी बुखार कहा जाता है. बीएमसी ने इन चूहों से निपटने के लिए नया प्लान तैयार किया है.

मुंबई महानगर पालिका ने तैयार किया गया चूहामार अभियान

बीएमसी ने योजना बनाई है कि वह रात में इन चूहों को मारने का मौका बेरोजगारों को देगी. न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में मुंबई नगर पालिका के पशु संक्रमण निरोध अधिकारी आर ए नरिनगरेकर ने कहा कि पिछले 6 महीनों में बीएमसी ने 2 लाख 27 हजार चूहों को मार चुकी है. चूहों की बढ़ती तादाद और संक्रामक बीमारी फैलने के खतरे की आशंका के चलते हमने चूहों को मारने के लिए रात में चूहामार अभियान चलाने का फैसला लिया है.

बेरोजगारों को मिलेगा मौका

नरिनगरेकर के मुताबिक, हम चूहा मारने के काम के जरिए बेरोजगार युवकों को रोजगार का मौका भी देना चाहते हैं. पानी भरने के कारण चूहों से लेप्टोस्पायरोसिस नामक बीमारी फैलने का खतरा बढ़ गया है. ऐसे में चूहों का खात्मा बहुत जरूरी है. इससे निपटन के लिए हमें काम की गति को और तेज करने की जरूरत पड़ेगी.

1 चूहा मारने के मिलेंगे 18 रुपए

बीएमसी के मुताबिक, एक चूहे को मारने पर 18 रुपए दिए जाएंगे. इस साल बारिश के मौसम में चूहों को मारने के लिए बीएमसी ने तीन बार विज्ञापन दिए. इसलिए इस बार चूहे मारने के लिए 10 की जगह 18 रुपए दिए जाएंगे. चूहे मारने के लिए बीएमसी के पास 30 ही स्टाफ हैं जो पर्याप्त नहीं हैं. मुंबई के 24 वार्डों में चूहों को मारने की जिम्मेदारी अब बेरोजगारों को दी जा रही है. दो साल पहले इस बीमारी से मुंबई में 7 लोगों की मौत भी हुई थी. इसके बाद बीएमसी के स्वास्थ्य विभाग ने चूहों को मारने के लिए अभियान शुरू किया.


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