गब्बर नहीं जर्नलिस्ट बनना चाहते थे अमजद ज़कारिआ खान


‘गब्बर सिंह’ का नाम सुनाई देते ही दिमाग में एक ही तस्वीर झलकती है और वो है मरहूम अमजद खान साहब की। 12 नवंबर 1940 में पेशावर पाकिस्तान में जन्मे अमजद खान का पूरा नाम अमजद ज़कारिआ खान है। उनकी मौत 27 जुलाई 1992 को भयंकर सड़क हादसे के बाद दिल का दौरा पड़ने से हुई। इस 27 जुलाई को शोले के गब्बर यानि अमजद खान जी की 26वी पुण्यतिथि है। इस दिन उनके परिवार की ओर से गरीबो को खाना खिलाने के साथ उनके लिए कुरान-ख्वानी और दुआएँ की जाती हैं। मुंबई में बांद्रा के गैलेक्सी थिएटर के पास के रेलवे फाटक के पास वो कब्रिस्तान है जहाँ अमजद खान को दफनाया गया था, उनका परिवार उनकी पुण्यतिथि के दिन यहाँ ज़रूर जाते हैं।

अमजद खान का परिवार बांद्रा-पश्चिम स्थित पुराने बंगले की जगह बने एक आलीशान इमारत “किआरा” में रहता है। उनकी पत्नी शेहला खान के मुताबिक जब उनकी शादी हुई तो अमजद खान फिल्मो में काम नहीं करते थे। वे एक जंर्नलिस्ट बनना चाहते थे। उन दिनों अमजद खान एस.एस.पिल्लई (स्क्रीन एडिटर) के अंडर काम करते थे और थिएटर जाया करते थे। वे बड़े ज़हीन किस्म के इंसान थे और अपनी ही सोच के मद्देनज़र उन्होंने कॉलेज के दिनों में दक्षिण अफ्रीका की समस्या पर आधारित नाटक रच कर उसमें अभिनय किया था। उन दिनों कॉलेज में वे भाई इम्तियाज़, शबाना आज़मी और निर्देशक रमेश सिप्पी जी की बहिन सुनीता के साथ मिलकर नाटक किया करते थे। बॉलीवुड की मशहूर और बेजोड़ फिल्म ‘शोले’ में गब्बर सिंह का ज़बरदस्त किरदार निभाकर बॉलीवुड में वे अमर हो गए। फिल्म शोले में अमजद खान का मशहूर डायलॉग था के ‘यहाँ से 50-50 कोस दूर, किसी गांव में रात को जब बच्चा रोता है तो माँ कहती है बेटा सो जा……नहीं तो गब्बर आ जायेगा।’ असल में अमजद खान बड़े ही नरम-दिल पिता थे। जब भी उनके किसी बच्चे को कुछ हो जाता था तो वे तुरंत डाक्टर के पास चलने की ज़िद्द करने लगते थे।

अपनी निजी ज़िंदगी के बारे बताते हुए अमजद खान की पत्नी शेहला खान ने बताया के अमजद हिल-व्यू वन और वे हिल-व्यू टू में रहती थी। उन दिनों वे कॉलेज में पढ़ती थी लेकिन अमजद खान से उनकी जान पहचान स्कूल के दिनों से ही थी। उनके परिवार आपस में परिचित थे और अमजद खान ने ही पहले उन्हें प्रोपोज़ किया था जिसके बाद सन 1972 में उनकी लव-मैरेज हुई। बेशक आज अमजद खान को गुज़रे 26 साल हो चले हैं पर पूरी दुनिया में बसे हिंदी फिल्म जगत के दीवानो के गब्बर सिंह की यादें हमारे दिलों में हमेशा ताज़ी रहेंगी।

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