31 भारतीय भगोड़े देश से करीब 40 हज़ार करोड़ रूपये लेकर भागे, 2015 से अब तक वित्तीय अनियमितताओं के 28 आरोपी विदेश भागे


Parliament house in New Delhi

भगोड़ा आर्थिक अपराधी बिल 2018 बुधवार को राज्यसभा में भी पास हो गया। वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, कानूनी प्रक्रिया से बचने के लिए देश छोड़कर भागने के मामले बढ़ रहे हैं, जिन्हें रोकना जरूरी है। इस समस्या से निपटने के लिए मौजूदा कानून में सख्ती के प्रावधान नहीं हैं। क्रिमिनल लॉ में भगोड़े अपराधियों की संपत्ति जब्त करने का अधिकार नहीं है। ऐसे लोगों से निपटने में नया बिल प्रभावी साबित होगा। लोकसभा में इस बिल को पिछले गुरुवार को ही मंजूरी मिल गई थी। इससे विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे भगोड़ों की देश-विदेश में संपत्तियां जब्त करना आसान हो जाएगा।

क्या है ये बिल : इसके तहत फाइनेंशियल फ्रॉड कर रकम चुकाने से इनकार करने वालों पर कार्रवाई होगी। आर्थिक अपराध में जिनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया हो उन पर एक्शन लिया जाएगा। 100 करोड़ रुपए से ज्यादा बकाया वाले बैंक लोन डिफॉल्टर्स पर कार्रवाई की जाएगी। भगोड़े आर्थिक अपराधियों की संपत्तियां बेचकर भी कर्ज देने वालों की भरपाई की जा सकेगी।

बिल के प्रावधानों के मुताबिक, डायरेक्टर या डिप्टी डायरेक्टर स्तर का अधिकारी किसी आरोपी को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर सकेगा। इसके लिए विशेष अदालत में याचिका देनी होगी। आरोपी के खिलाफ पर्याप्त सबूत देने होंगे। किसी अपराधी को भगोड़ा घोषित करने के लिए याचिका में उसके पते-ठिकानों के साथ ही उसकी संपत्तियों का ब्यौरा भी शामिल होगा। जब्त किए जाने योग्य बेनामी संपत्तियों और विदेशी संपत्तियों की लिस्ट भी देनी होगी। साथ ही इन संपत्तियों से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी भी शामिल होगी। मार्च 2017 में भी ये बिल लोकसभा में पेश किया गया लेकिन पास नहीं हो पाया। बाद में सरकार इसे अध्यादेश के रूप में लाई।

आरोपी को पेश होने का समय मिलेगा : आवेदन मिलने के बाद स्पेशल कोर्ट आरोपी को 6 हफ्ते के अंदर पेश होने के लिए नोटिस जारी करेगा। अगर आरोपी तय जगह पर पेश हो जाता है तो कोर्ट भगोड़ा आर्थिक अपराध बिल के तहत कार्रवाई नहीं करेगा।

आर्थिक अपराध में 18 भगोड़ों का प्रत्यर्पण बाकी : 48 देशों के साथ भारत की प्रत्यर्पण संधि है। 2014 से अब तक आर्थिक अपराध के मामलों में सिर्फ 4 अपराधियों का प्रत्यपर्ण हो पाया है। 18 भगोड़ों को अभी तक नहीं लाया जा सका है। इनके लिए संबंधित देशों से प्रत्यर्पण की अपील की जा चुकी है।

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