पावरकॉम की सुंदरनगर डिवीजन के बाद साहनेवाल डिवीजन में हुआ करोड़ों रुपए का फर्जी बिलिंग घोटाला, विभाग ने किया RA को सस्पैंड


Scam

लुधियाना – पावरकॉम की सुंदरनगर डिवीजन के बाद साहनेवाल डिवीजन में भी करोड़ों रुपए का फर्जी बिङ्क्षलग घपला होने से विभाग में हड़कंप मच गया है। उक्त मामले में विभाग की तरफ से आर.ए. को सस्पैंड करने के साथ ही पुलिस को शिकायत दे दी है। बता दें कि इससे पहले सुंदर नगर डिवीजन में हुए फर्जी बिलिंग घप्पले में भी आर.ए. को सस्पैंड करने के साथ ही 3 प्राइवेट मुलाजिमों के खिलाफ बनती कानूनी कार्रवाई करने हेतु पुलिस को बकायदा लिखित तौर पर शिकायत भी दी गई।

पता चला है कि आरोपियों का गिरफ्तार करवाने के लिए विभाग ने पीड़ित उपभोक्ताओं से एफीडेवट भी शिकायत के रूप में एस.पी. क्राइम को दिए हैं, लेकिन आज तक न तो किसी एक भी आरोपी मुलाजिम के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज हुई व न ही किसी को काबू किया गया है। जानकारी के अनुसार इस करोड़ों रुपए के घप्पले में पावरकॉम की तरफ से की गई जांच दौरान 2 आर.ए. समेत 15 के करीब मुलाजिम, जिनमें ज्यादातर प्राइवेट ही है, कि शमूलियत पाई गई है। प्राईवेट मुलाजिमों को तो नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है, जबकि आर.ए. से जवाबतलबी की जा रही है। विभागीय स्तर पर हुई अभी तक की जांच में सुंदर नगर के आर.ए. की घप्पलेबाजी में सीधें तौर पर शमूलियत सामने नहीं आ रही, जबकि साहनेवाल मामले में आर.ए. के शामिल होने के बारे में संकेत मिले हैं। फिलहाल विभागीय व पुलिस जांच होने के बाद ही यह पता चल पाएगा कि उक्त मामलों में दोनों आर.ए. की किस हद तक शमूलियत रही।

आर.ए. का आई.डी. पासवर्ड अहम कड़ी

विभागीय सूत्रों के मुताबिक बिलिंग के मामले में तब तक किसी भी स्तर पर कोई घप्पलेबाजी संभव नहीं है, जब तक आर.ए. का आई.डी. पासवर्ड लीक न हुआ हो या उसका दुरुप्रयोग न हुआ हो। यह भी पता चला है कि जो अभी तक करोड़ों रुपए के बिजली बिङ्क्षलग की घप्पलेबाजी के मामले सामने आए हैं, उसमें आर.ए. का आई.डी. पासवर्ड तो इस्तेमाल हुआ ही है, साथ ही जांच में यह बात भी सामने आ रही है कि आर.ए. के कंप्यूटर तक का इस्तेमाल भी शातिर मुलाजिमों की तरफ से किया गया है।

चैक बाऊंस व रीवर्स एंट्री की गेम

करोड़ों रुपए की घप्पलेबाजी में शातिर मुलाजिमों ने चैक बाऊंस व रीर्वस एंट्री की ऐसी गेम खेली कि बिजली विभाग के उच्चाधिकारियों को तो क्या ऑडिट विभाग को भी कई महीनों तक इसका पता नहीं चला। जब एक के बाद एक फर्जी बिलिंग का मामला सामने आया तो यह संख्या 10 हजार का आंकड़ा भी पार कर गई। पता चला है कि इस तरह की घप्पलेबाजी केवल लुधियाना पावरकॉम के ऑफिसों में ही नहीं हुई बलकि पंजाब के अन्य शहरों में भी सामने आने शुरू हो गए हैं।

  • 288
    Shares

LEAVE A REPLY