शहर के कई ब्लड बैंकों में हुई खून की कमी, मरीजों की जिंदगियां खतरे में


Blood Donation

शहर के कई ब्लड बैंकों में ब्लड की शार्टेज चल रही है। इन ब्लड बैंकों में जहा रेयर ब्लड ग्रुप का स्टॉक बेहद कम है, वहीं आसानी से मिलने वाले ए, बी, एबी और ओ पॉजिटिव का स्टाक भी खत्म होने के कगार में है। हालात यह हो गए हैं कि जिन ब्लड बैंकों में पहले आमतौर पर हर समय सभी तरह के ब्लड ग्रुप का 300 से 400 यूनिट का स्टाक रहता था, अब यह घटकर 50 से 150 यूनिट तक सिमट गया। इमरजेंसी की स्थिति में ब्लड लेने के लिए जरूरतमंद परिवारों को रक्तदाताओं को बुलाने को बाध्य होना पड़ रहा है। उधर, दूसरी तरफ ब्लड बैंक के संचालकों का कहना है कि ब्लड बैंकों में खून की शार्टेज आने की वजह स्वैच्छिक रक्तदान में कमी होना है। लोग अपने मरीजों के लिए ब्लड लेने के लिए तो आ रहे हैं लेकिन औरों के मरीजों की जिंदगी बचाने के लिए रक्तदान नहीं करने आ रहे हैं।

ब्लड के लिए डोनर साथ ला रहे तीमारदार

रघुनाथ अस्पताल के ब्लड बैंक के टेक्नीशियन तरसेम सिंह के अनुसार स्वैच्छिक रक्तदान न होने से ब्लड बैंकों के लिए दिक्कत बढ़ी है। गर्मियों में बीमारिया बढ़ने से ब्लड की डिमाड ज्यादा है। लोग ब्लड के लिए डोनर साथ लेकर आ रहे हैं।

एनजीओ की मदद से मिल रहा नया जीवन

पिछले पंद्रह दिनों से सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक के स्टॉक में भारी कमी पाई गई है। बाहर के अस्पतालों से आने वाले कई जरूरतमंद मरीजों को भी खून उपलब्ध कराने में दिक्कत हो रही है। फिलहाल एनजीओ की मदद से स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मदद ली जा रही है। यदि लोग स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आएं, तो यह शार्टेज कम हो सकती है।

रोजाना 30 से 40 यूनिट ब्लड की है मांग

सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक के इंचार्ज डॉ. ग्रेवाल ने कहा कि हमारे यहा नेगेटिव ब्लड के साथ-साथ एबी पॉजिटिव और ए पॉजिटिव ब्लड की कमी चल रही है। माग के अनुरूप रक्त की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। अकेले सिविल अस्पताल व मदर एंड चाइल्ड अस्पताल में रोजाना तीस से चालीस यूनिट ब्लड जा रहा है क्योंकि यहा गर्भवती महिलाएं व इमरजेंसी में दुर्घटना में घायल हुए लोग काफी संख्या में आते हैं।

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