व्हाट्सएप पर आए अंजान नंबर से मैसेज पर दिखे डरावनी शक्ल वाली लड़की तो तुरंत करें Block


ब्लू व्हेल चैलेंज के बाद अब सोशल मीडिया पर एक ओर खतरनाक चैलेंज ने पेरैंट्स व स्कूलों के अलावा सरकार को टैंशन में डाल रखा है। इस मोमो चैलेंज में गेम की शुरूआत एक अंजान नंबर से होती है। इस गेम के लिए अंजान नंबर से ही बच्चों व युवाओं से संपर्क करके उन्हें गेम के साथ जोड़ा जाता है। चंगुल में फंसते ही जब बच्चे उक्त अंजान नंबर को सेव करते हैं तो एक बड़ी व अजीब सी आंखों वाली कार्टून रूपी डरावनी शक्ल वाली लड़की सामने आती है और टॉस्क देने लगती है।

इस गेम के लिए उन लोगों को चुना जाता है जिनके स्टेटस सोशल मीडिया पर परेशानी वाले लगते हैं। यह भी एक सुसाइड गेम है। इसमें इंटरनैट टास्क के तौर पर डरावनी शक्ल वाली लड़की गेम खेलने वाले से बातचीत शुरू करके उसे नए टास्क पूरा करने के लिए कहती है। जब कोई इसे न पूरा करे तो उसे विभिन्न तरीकों से धमकाया जाता है। ऐसे में इसे खेलने वाला जब फाइनल टास्क तक पहुंचता है तो प्लेयर को अपनी जान देने का चैलेंज दिया जाता है। खबरों के मुताबिक भारत में इससे हुईं मौतों के 3 मामले अब तक सामने आ चुके हैं। मोमो चैलेंज की शुरूआत अर्जेंटीना से बताई जा रही है। वहीं इसने सबसे पहले अपना शिकार बनाया था। इस गेम का ङ्क्षलक व्हाट्सएप के जरिए प्रसारित हो रहा है।

देश में अब तक 3 मौतों की खबर

अब तक मोमो चैलेंज से जो 3 मौतें देश में होने के मामले सामने आए हैं, उनमें 2 पश्चिमी बंगाल व 1 मामला राजस्थान के अजमेर का बताया गया है। खबरों के मुताबिक राजस्थान में 10वीं की छात्रा ने इस गेम के चक्कर में आकर हाथ की नस काट ली और फिर आत्म हत्या कर ली। विद्यार्थियों को इस गेम के चंगुल में फंसने से बचाने के लिए सतर्क हुई केंद्र सरकार के निर्देशों के बाद सी.बी.एस.ई. ने अपनी एडवाइजरी जारी की है।

बच्चों में ये हो सकते हैं लक्षण

  • बच्चे का हर बात पर गुस्सा करना।
  • उदास, परेशान व टैंशन में रहना।
  • परिवार व दोस्तों से खुद को अलग रखना।
  • बच्चे में बढ़ रहा जिद्दीपन।
  • अपनी पसंदीदा एक्टिविटी से परहेज।
  • शरीर पर कोई चोट का निशान होना।

पेरैंट्स इन बातों का रखें ध्यान

  • बच्चा तनाव की बात करे तो उससे कारण पूछें।
  • बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर रखें नजर।
  • स्कूल टीचर से बच्चे की रिपोर्ट लें।
  • अगर लगे बच्चा गेम में संलिप्त है तो मनोचिकित्सक की मदद लें।
  • बच्चे के मोबाइल में सेव नंबरों को जांचे।
  • मोबाइल फोन को एंटी वायरस से सुरक्षित रखें।

ऐसे करें परहेज

  • अपने व्हाट्सएप नंबर पर किसी अज्ञात से बात न करें।
  • किसी अंजान को व्हाट्सएप नंबर न दें।
  • अज्ञात नंबर से मोमो की फोटो आने पर नंबर को ब्लाक करें।
  • ईमेल व सोशल अकाऊंट्स के पासवर्ड बदलें।

क्या है एडवाइजरी में

  • पेरैंट्स व टीचर्ज बच्चों से बात करें कि सोशल मीडिया पर वह क्या कर रहे हैं।
  • इंटरनैट हिस्ट्री जरूर चैक करें।
  • अगर बच्चे के शरीर पर कोई घाव या निशान है तो तुरंत उसके बारे में पूछें।
  • स्कूल में बात करें कि बच्चा वहां कैसा व्यवहार कर रहा है और घर पर कैसा व्यवहार कर रहा है।

 

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