ईंट भठ्ठा मालिकों ने एपिलेट अर्थोटी द्वारा नोटिफिकेशन वापिस लिये जाने का किया विरोध


Brick Kiln Owners opposed withdrawal of notification

लुधियाना – पंजाब ईंट भठ्ठा मालिक ऐसोसियेशन ने ऐपिलेट अर्थोटी के उस निर्णय का विरोध किया है जिसमें 9 अप्रैल 2018 को जारी किये गये नोटिफिकेशन को खारिच कर दिया गया है तथा पंजाब में प्रदूषण फैलाने वाली सभी औद्योगिक ईकाईयों में ग्रेड रिस्पोंस एक्शन प्लन (ग्रेप) का सख्ताई से पालन की पैरवी करता है। इसी दौरान यह भी प्रास्ताव पारित किया गया कि ईंट उद्योग को खनन उद्योग में नहीं गिना जाये और इनवायरमेंट क्लेयरेंस के दाये से बाहर किया जाये। यदि संघ की बात नहीं मानी गई जो भठ्ठों को एक फरवरी तक नहीं चलाया जायेगा। प्रदेश के करीब 2800 से भी अधिक ईंट भठ्ठों वाले इस संघ की आज एक बैठक अध्यक्ष कुलदीप सिंह मक्कड की अगुवाई में आयोजित की गई जिसमें सभी जिलों के अध्यक्ष और सचिवों ने भाग लिया। ऐसोसियेशन का मत था कि भठ्ठा मालिकों ने नोटिफिकेशन के आधार पर ही अपनी भठ्ठियों में बदलाव किये है तथा अब नोटिफिकेशन के खारिज किये जाने पर उन्हें अपना व्यापार चलाने में काफी मुश्किलों को सामना करना पडेगा ।

ऐसोसियेशन पंजाब पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के सभी हिदायतों का सदैव से पालन करता रहा है जिसके अंर्तगत अधिकतर भठ्ठे गिरा दिये है और फायरिंग पीरियड के संयोजित तैयारिया कर ली जिससे की विश्व र्प्यायवरण दिवस पर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेन्द्र सिंह के तंदरुस्त पंजाब में अपना योगदान दिया जा सके। ऐसोसियेशन का यह भी दावा है कि उनके पास मार्केट में र्प्याप्त स्टॉक है परन्तु रियल इस्टेट उद्योग की सुस्त मांग के कारण उनके व्यापार कई अड़चने आ रही है। ऐसोसियेशन के अध्यक्ष कुलदीप सिंह मक्कड ने बताया कि ईंट-भठ्ठा उद्योग अन्य उद्योगों से बिल्कुल भिन्न है। फायरिंग पीरियड शुरु होने से कम से कम दो माह पहले ही उन्हें अपनी गतिविधियां प्लान करनी होती है और इसी तरह फायरिंग पीरियड के बंद होने से पहले। सर्दियों में विशेषकर हवा की गुणवत्ता काफी हद तक प्रभावित होती है जो कि 300 एमजी स्तर से अधिक हो जाती है, इस दिशा में सरकार को प्रदूषण फैलाने वाले औद्योगिक ईकाईयों में नकेल कसनी चाहिये।

31 जनवरी 2019 तक सभी पारम्परिक भठ्ठों को बंद व गिराने के पीपीसीबी के नोटिस पर तेजी दिखाते हुये ऐसोसियेशन ने अपनी पचास फीसदी से भी अधिक भठ्ठों को गिरा दिया है और नई जिग जैग तकनीक को अपनाने की ओर अग्रसर हैं। ऐसोसियेशन के महासचिव सुरेन्द्र सिंगला ने बताया कि सर्दियों में भठ्ठे चलाने के लिये कोयले की ज्यादा खपत होती है जो कि प्रति एक लाख ईंटों पर 14 से 15 मैटिक टन कोयला है जबकि गर्मियों में यह खपत प्रति एक लाख ईंटों पर 10 से 11 मैटिक टन है । इससे सर्दियों में लागत के चलते प्रदूषण का स्तर और मालिकों के खर्चे भी बढ जाते हैं। ऐसोसेयिशन इन चार महीनों में ईंट भठ्ठों के बंद होने की पैरवी भी करता है जो कि समाज और भठ्ठा मालिकों के हित में है। गेडिड रिस्पोंस एक्शन प्लान (ग्रेप) की समझ तकनीकी तौर से समझने के लिये काफी जटिल है तथा इसका आधार एम्बियंट ऐयर क्वालिटी (एएक्यू) पर अधारित है । वायु की गुणवत्ता सर्दियों में ओर अधिक बिगड जाती है जिसके कारणों में पराली जलाने व अन्य कारण शामिल हैं। ऐसोसियेशन मांग करती है कि इस दिशा में निश्चित तारिख तय की जाये जिससे की भठ्ठा मालिक अपनी प्लानिंग कर सकें।

मक्कड ने बताया कि वे अब तक पीपीसीबी की गाईडलाईंस जो कि नैश्नल ग्रीन टिब्यूनल (एनजीटी) पर अधारित था का पालन कर रहे थे। ईंट भठ्ठा मालिकों ने इसी के अनुसार अपनी गतिविधियां प्लान की हुई थी और अब अथोरिटी के इस फैसला से अपने आप का ठगा से महसूस कर रहे हैं। उन्होनंे मांग की है कि अथोरिटी इस फैसला पर एक बार भी गौर करे जिससे की सरकार का सहयोग कर रहे भठ्ठा मालिको को भी लाभ मिले। इस अवसर पर संघ के संरक्षक पीएस संधू, कृष्ण लाल वसल , चैयरमेन दविन्द्र के राजदेव, मुख्य सरंक्षक चमन लाल गोयल और राजपाल गुप्ता, सीनियर वाईस प्रेजीडेंट एचएस सैखों, वाईस प्रेजीडेंट अमरजीत सैनी, रमेश मोही, विशाल सोनी, नरेन्द्र बंसल, कैश्यिर सीए रविन्द्र गोयल और अन्य सदस्य शामिल हुए।

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