ड्रग्स डीलर्स और अपराधियों को पकड़ने के लिए बच्चों का इस्तेमाल कर रही है ब्रिटेन पुलिस, क्या पंजाब पुलिस अपनाएगी यह रास्ता


boy-spying

लंदन – ब्रिटेन की पुलिस और खुफिया एजेंसियां बच्चों को जासूस बना रही हैं। इसके जरिए वे आतंकियों, अपराधियों के गिराेह और ड्रग्स के कारोबारियों के नेटवर्क को खत्म चाहती है।ब्रिटेन की संसदीय समिति की रिपोर्ट में शुक्रवार को यह खुलासा हुआ। इसमें कहा गया कि जासूसी में लगाए गए बच्चों में से कई की उम्र 16 साल से भी कम है। हालांकि, यह नहीं बताया गया कि इनमें नाबालिग कितने हैं। पिछले हफ्ते ही सरकारी अधिकारियों ने संसद में एक प्रस्ताव रखा था, जिसमें जासूसी करने वाले 18 साल से कम उम्र के बच्चों की मिशन अवधि एक महीने से बढ़ाकर चार महीने करने की मांग की गई थी। इसी के जवाब में यह रिपोर्ट लंदन के हाउस ऑफ लॉर्ड्स में पेश की गई।

बच्चों के हितों को नुकसानः संसद में कानून समीक्षा समिति के अध्यक्ष लॉर्ड ट्रेफगार्न ने कहा कि युवा पीढ़ी को जासूसी में शामिल करने की नीति पर कमेटी के सदस्यों में काफी चिंता है। किसी युवा शख्स को जासूसी जैसे कामों में शामिल करने से उनकी मानसिक और शारीरिक क्षमताओं पर असर पड़ता है। वहीं, गृह विभाग ने कहा कि 18 साल से कम उम्र के जासूस कई बार आतंकियों और गिरोह से ऐसी जानकारी जुटा लेते हैं जो अपने आप में अनोखी होती है। हालांकि, इस काम में बच्चों का इस्तेमाल कम ही हो रहा है।

हर हाल में अपराध रोकना है : गृह विभाग के अधिकारी बेन वॉलेस के मुताबिक, “युवा तेजी से अपराध की दुनिया का शिकार बनते जा रहे हैं। साथ ही कई खुद आतंक, गिरोह हिंसा, ड्रग्स के कारोबार और यौन हिंसा में शामिल हैं। ऐसे में बच्चों को जासूसी अभियानों में शामिल कर एेसे अपराधों को रोका जा सकता है।”

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