पीएम मोदी की हत्या की साजिश – नजरबंद पांच वामपंथी विचारकों के पक्ष में आए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी


Gautam Navlakha

भीमा कोरेगांव हिंसा की साजिश और माओवादियों से संबंध के आरोप में मंगलवार को गिरफ्तार या नजरबंद किए गए पांच वामपंथी विचारकों के पक्ष में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी खुलकर सामने आए. उन्होंने वरवर राव, सुधा भारद्वाज, अरुण परेरा, वरनन गोंजाल्विस और गौतम नवलखा की गिरफ्तारी का विरोध करते हुए केंद्र सरकार पर विरोधियों को जेल में डालने का आरोप लगाया. लेकिन इस पांच व्यक्तियों में तीन ऐसे हैं जिन्हें कांग्रेस सरकार के दौरान भी लगभग ऐसे ही आरोपों में गिरफ्तार किया गया था.

राहुल गांधी ने मंगलवार को ट्वीट किया था, ‘भारत में सिर्फ एक एनजीओ के लिए जगह है और इसका नाम आरएसएस है. बाकी सभी एनजीओ बंद कर दो. सभी एक्टिविस्टों को जेल में भेज दो और जो लोग शिक़ायत करें उन्हें गोली मार दो. न्यू इंडिया में आपका स्वागत है.’ लेकिन जिन लोगों की गिरफ्तारी के विरोध में ये ट्वीट किया गया था, उनमें से वरनन गोंजाल्विस, अरुण परेरा और वरवर राव को कांग्रेस सरकार में भी माओवादियों से संबंध के आरोप में गिरफ्तार किया जा चुका है.

वरवर राव एक एक्टिविस्ट और कवि हैं. उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की कथित साजिश रचने के आरोप में हैदराबाद से गिरफ्तार किया गया. इससे पहले उन्हें विद्रोह भड़काने वाले लेखन के आरोप में 1974-75 के दौरान गिरफ्तार किया गया. इसके बाद उन्हें आपातकाल के दौरान मीसा कानून के तहत गिरफ्तार कर लिया गया. उन्हें 2005 में आंध्र प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने एक बार फिर माओवादियों से संबंध के आरोप में गिरफ्तार किया.

कार्टूनिस्ट से एक्टिविस्ट बने अरुण परेरा को 2007 में प्रतिबंधित संगठन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) की प्रचार और कम्युनिकेशन विंग का नेता बता कर गिरफ्तार किया गया. सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें सीपीआई(एम) की केंद्रीय बॉडी का मेंबर और महाराष्ट्र इकाई का सचिव बताया था. वो करीब पांच साल तक जेल में रहे और 2014 में उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया गया.

वरनन गोंजाल्विस को 19 अगस्त 2007 को महाराष्ट्र एंटी-टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) ने मुंबई से गिरफ्तार किया. उन पर आरोप था कि वो टॉप लेबल के नक्सल नेता हैं और विस्फोट की भयानक योजना बना रहे हैं. इसके अलावा उन पर आरोप था कि वो मजदूरों का अंडरकवर नेटवर्क बनाकर शहरी क्षेत्रों में नक्सलवाद को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं. इन मामलों में उन्हें करीब छह साल जेल में बिताने पड़े.

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