14 वर्षीय किशोरी का शारीरिक शोषण करने वाले दोषी को अदालत ने सुनाई मौत होने तक जेल की सजा


Accused in Jail

लुधियाना – अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रश्मि शर्मा की अदालत ने अपने ही घर की 14 वर्षीय किशोरी का शारीरिक शोषण करने के दोषी बलवीर सिंह उर्फ लाली को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि दोषी को मृत्यु तक जेल में रहना होगा। इसके अलावा अदालत में उसे दो लाख दस हजार रूपये जुर्माना भी अदा करने का आदेश दिया गया है। इसमें से 2 लाख रुपये हर्जाना पीड़ित लड़की को मिलेगा। बलवीर गांव रत्न, जोधां लुधियाना का रहने वाला है।

पुलिस थाना जोधां ने 7 अगस्त, 2017 को आरोपित के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। पीड़िता ने पुलिस को दिए बयानों में आरोप लगाया था कि उसकी मां जन्म लेते ही उसे छोड़ कर चली गई थी। उसका पिता भी उसे छोड़ कर चला गया था। उसका पालन पोषण उसके दादा-दादी ने किया था। उसके बाद उसकी बुआ परमजीत कौर व फूफा पढ़ाने के लिए उसे अपने गांव रत्न ले गए थे। अक्सर उसकी बुआ उसे घर में छोड़ कर चली जाती थी। इस दौरान उसकी बुआ का देवर बलवीर सिंह उसे तंग करता था। वह उसके साथ गंदी हरकतें करने लगा, जिस दौरान उसने सारी बात अपने बुआ और अपने फूफा को भी बताई। उन्होंने भी कोई कार्रवाई करने की बजाय यह कहकर टाल दिया कि वह उसे बच्चों की तरह ही प्यार करता है।

पीड़ित के अनुसार एक दिन जब वह घर में अकेली थी तो आरोपित ने जबरदस्ती उसके साथ दुष्कर्म किया। बाद में जब उसने यह बात अपनी दादी को बताने की बात कही तो आरोपित उसे धमकियां देने लगा। यहां तक कि अपने रिश्तेदारों को बताने के बावजूद आरोपी यह काम करता रहा। पेपर देने जब गांव रत्न जाती तो आरोपित उसे जबरन अपने साथ ले जाकर उसके साथ गलत हरकत करता। फिर, उसने यह बात अपनी स्कूल की एक टीचर को बताई, जो उसे स्कूल की प्रिंसिपल के पास ले गईं। उन्होंने सारी बात सुनने के बाद पुलिस को सूचित कर दिया।

अदालत ने कहा, नजदीकी रिश्तेदार होकर घृणित कार्य किया

पुलिस ने लड़की की शिकायत पर पहले मामला परमजीत कौर, किरणदीप कौर व जसपाल सिंह और बलवीर सिंह के खिलाफ दर्ज किया था। बाद में अदालत में इनके खिलाफ चालान न पेश करते हुए केवल आरोपित बलवीर सिंह के खिलाफ ही चालान पेश किया। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने तमाम दलीलों को नामंजूर करते हुए कहा कि आरोपित पीड़िता का बेहद नजदीकी रिश्तेदार है। उससे यह घृणित कार्य की उम्मीद नहीं की जा सकती थी।

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