30 साल के अखिलेश यादव चंद मिनटों में बने खरबपति पर हाथ अब भी खाली


डेराबस्सी में राजस्थान की एक लिकर कंपनी के मेंटेनेंस मैनेजर अखिलेश यादव के बैंक अकाउंट में 16 खरब 54 अरब 2 करोड़ 23 लाख 63000 रुपए से अधिक अमाउंट क्रेडिट होने का हैरानीजनक मामला सामने आया है। अखिलेश को समझ नहीं आ रहा कि वह इस ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की खुशी मनाए या कोई फ्रॉड मानकर भूल जाए। अखिलेश यादव पुत्र मुंशी लाल यादव वासी एटीएस अपार्टमेंट्स के यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के बैंक अकाउंट में दो किस्तों में यह अमाउंट क्रेडिट हुई। वीरवार को उनके बैंक अकाउंट में सुबह 11 बजकर 12 मिनट पर 8,27,01,11,76,898 रु. यानी 8 खरब 27 अरब से अधिक की राशि जमा हुई। कुछ मिनट बाद 11:28 पर फिर से 8,27,01, 11,86,252 रुपए जमा हुए। अखिलेश के खाते में उस समय 2149.26 रु बैलेंस ही था। खरबों रुपए बैंक स्टेटमेंट में शो तो हो रहे हैं, लेकिन एवलेबल बैंलेंस में नहीं आ रही। उसके एवलेबल बैलेंस में करीब दो हजार रुपए ही दिख रहे हैं। अखिलेश ने वीरवार शाम एटीएम से ₹500 रु. चेक करने के लिए निकलवाए भी, लेकिन खरबों रुपए उसके अकाउंट में दिखे नहीं। ट्राईसिटी में इस तरह का यह पहला केस सामने आया है। कस्टमर केयर पर बात करने और ई-मेल डालने के बावजूद अखिलेश को यह नहीं बताया गया कि पैसा किसने और कहां से ट्रांसफर किया। स्टेटमेंट में इस ट्रांजेक्शन के आगे यूपीआईएबी ही लिखा है। यूपीआई यानी युनिफाइड पेमेंट इंटरफेस जो आरबीआई के मोबाइल टू मोबाइल मनी ट्रांजेक्शन के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इस बारे में लोकल बैंक की ब्रांच मैनेजर से कोई तसल्लीबख्श जवाब नहीं मिला। अखिलेश का मूल खाता यूबीआई बैंक की सीतापुर शाखा, उत्तरप्रदेश में है। वहां संपर्क करने पर उसे बताया गया कि बैंक में अखिलेश के खाते की स्टेटमेंट में यह राशि कहीं रिफ्लेक्ट नहीं हो रही है। वहीं, इस बारे में पंजाब एंड सिंध बैंक, दिल्ली के एजीएम कुलदीप सिंह ने बताया कि यह किसी हेकर की कोशिश भी हो सकती है, ताकि वह एटीएम पिन व ओटीपी आदि का पता कर खाते का मिसयूज कर सके।

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