अपने परिवार वालों के लिये प्रतिदिन रस्सी पर चलने को मजबूर है नन्हे बच्चे – बाल दिवस पर सरकारी कार्यप्रणाली पर उठते है कई सवाल


आज के महंगाई के दौर में निम्न स्तरीय लोगों को अपनी प्रतिदिन की जरूरते पूरी करना काफी मुश्किल होता जा रहा है जहां देश प्रतिदिन अपनी उपलब्धियों के बल पर आगे बढ़ रहा है वहीं दूसरी तरफ गरीब दिन प्रतिदिन गरीब होता जा रहा है ऐसे में लोग अपनी जीवनी के लिये अपने बच्चों को भी कामधंधों में लगा रहे है जिससे उन्हें कुछ आर्थिक मदद मिल जाती है | ऐसा ही एक दृश्य शहर के मॉडल टाउन में देखने को मिला जहां पर एक छोटी बच्ची अपने परिवार वालों की जरूरतों को पूरा करने के लिये पढ़ाई करने की बजाय रस्सियों पर चलने को मजबूर है|

जब इस बारे में बच्ची के माता- पिता से बात की गई तो उन्होंने बताया की वह बिलासपुर के रहने वाले है और सड़कों पर ही अपना जीवन बिताते है और जो उन्हें आर्थिक मदद इस बच्ची द्वारा दिखाये गये कर्त्व से होती उससे वह अपना जीवन यापन करते है| जब बच्ची के पिता से इस बारे में पूछा गया की वह इस बच्ची को पढ़ाते क्यों नहीं है तो उन्होंने बताया की उनके पास रोजमर्रा की जरूरते पूरी करने के लिये पैसे नहीं तो वह किस तरह अपनी बच्ची को शिक्षा प्रदान करवाये| जहां आज सारा देश पूर्व प्रधानमंत्री श्री जवाहरलाल नेहरु जी के जन्मदिवस पर बालदिवस मना रहा है वहीं देश भर में अपने जरूरतों को पूरा करने के लिये छोटे छोटे नन्हे बच्चे मजदूरी करने को मजबूर है जो की सरकार द्वारा उठाये गये कदमों पर कई प्रश्न पैदा कर रहें है|

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