पावरकॉम और नगर निगम की लापरवाही एवं भ्रष्ट व्यवस्था ने बच्ची को बनाया विकलांग, 11000 वोल्ट से झुलसी गुनगुन का काटना पड़ा हाथ


Due to Negligence of Powercom and Municipal Corporation Ludhiana Baby's Hand Cut Down after Electric Shock

लुधियाना शहर में किस प्रकार नगर निगम और पावरकॉम काम करती है यह हर कोई जानता है एक छोटा सा काम करवाने के लिये आम लोगों को कई बार अधिकारीयों के चक्कर लगाने पडतें है पर फिर भी उनकी कोई नहीं सुनता है| अभी भी शहर में कई इलाकों में बिजली की तारों के नीचे बिल्डींग का निर्माण हो रहा है पर नगर निगम और पावरकॉम इन बातों को नजरअंदाज करता आ रहा है वहीं कई बार पावरकॉम की लापरवाही के कारण कई लोगों और जानवरों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है ऐसा ही एक मामला सामने आया है जिसमें एक हादसे ने हंसती खेलती मासूम बच्ची को विकलांग बना दिया है दरअसल बीती 19 जुलाई को 11000 वोल्ट से झुलसी 11 साल की बच्ची का शनिवार को एक हाथ भी काटना पड़ा। हमेशा चहकने वाली बच्ची सदा के लिए विकलांग हो गई। नगर निगम और पावरकॉम ने उसे जीते जी मार दिया। क्योंकि निगम ने हाईटेंशन तारों के नीचे अवैध रूप से बिल्डिंगें बनने दीं और पावरकॉम ने छत-दीवारों को छूकर गुजर रहीं एचटी लाइनों को लेकर कोई कदम नहीं उठाया। 15 अगस्त को गुनगुन के जैसे सैकड़ों बच्चे कलरफुल ड्रेस पहने प्रोग्राम में डांस कर रहे होंगे। गुनगुन को भी डांस का बड़ा शौक था। अब उसका यह सपना शायद ही कभी पूरा हो।

एक अंगुली-अंगूठा और दोनों पैरों की पांच अंगुलियां काटनी पड़ी थीं

– भ्रष्ट व्यवस्था ने उसके सपनों की हत्या कर दी। जहां हादसा हुआ, वहां दुकान के ऊपर बनाई इलीगल बिल्डिंग में किराए पर चल रहे डांस इंस्टिट्यूट में वह प्रैक्टिस करने जाती थी। हादसे में गुनगुन की सहेली 12 वर्षीय इश्मीत कौर की मौत हो गई थी।
– जब इश्मीत को करंट लगा तो गुनगुन ने बहादुरी से उसे बचाने की कोशिश की। पैर पकड़कर इश्मीत को खींचने लगी तो उसे भी करंट का तेज झटका लगा। जीटीबी हॉस्पिटल में इलाज चला, लेकिन बाएं हाथ की एक अंगुली-अंगूठा और दोनों पैरों की पांच अंगुलियां काटनी पड़ी थीं। इसके बाद उम्मीद थी कि वह ठीक हो जाएगी, लेकिन बाएं हाथ की बाकी अंगुलियां भी काली पड़ गईं।
– एक दिन अचानक खून निकलने लगा। परिजन बच्ची को लेकर अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टरों ने जांच के बाद पाया कि इंफेक्शन फैलने का खतरा है और बच्ची की जान बचाने के लिए हाथ काटना पड़ा।

संभलने लगी थी, अब हाथ देखकर मां से झगड़ती है

– पहले 1 अगस्त को हॉस्पिटल से छुट्टी मिलने के बाद गुनगुन संभलने लगी थी। घर-परिवार, बच्चों-दोस्तों के बीच उस भयानक मंजर को तकरीबन भूल चुकी थी। पर अब वह बदहवास है। मां से झगड़ती है। रोती है-मेरा हाथ क्यों कटवा दिया। मेरे हाथ-पैर कटवाने के लिए हॉस्पिटल लाते हो?
– ऑपरेशन के बाद होश आया तो कटा हाथ देखा वह फूट-फूटकर रोई। माता-पिता से बच्ची की हालत देखी नहीं जाती। उनका बस यही दर्द है- दूसरों की गलतियों की सजा उनकी बच्ची को क्यों मिली?
– ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर ईश कुमार ने कहा, लेफ्ट हैंड से ही करंट बॉडी में गया था, इसलिए यह हिस्सा ज्यादा डैमेज हुआ। आखिरकार हाथ काटना पड़ा। अब बच्ची खतरे से बाहर है।

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