सर्जरी से भी ठीक हो सकती है मिर्गी – हैदराबाद के डॉक्टर ने लुधियाना में की पहली एपिलेप्टिक सर्जरी


लुधियाना – अब तक यह ही समझा जाता था कि मिर्गी की बीमारी (एपिलेप्सी) का इलाज केवल दवा ही है। लेकिन इसके अधिकतर मरीजों को सारी उम्र दवा खानी पड़ती है। लगातार दवाई खाने से उनमें मेमोरी लॉस और लिवर डैमेज की समस्या हो जाती है। मगर लगातार हो रही रिसर्च के बाद अब इसका इलाज सर्जरी से भी होने लगा है। इसी के तहत हैदराबाद के किम्स हॉस्पिटल से आए डॉ. मानस पनिग्राही ने लुधियाना में पहली सर्जरी की। मॉडल टाऊन के दीप हॉस्पिटल में की गई इस सर्जरी के बाद पत्रकारों से बातचीत में डॉ. मानस ने बताया कि हमारे देश में हर साल पांच लाख बच्चे मिर्गी की बीमारी के साथ पैदा होते हैं। प्री-मेच्योर डिलीवरी होने या कुपोषण का शिकार मां के पेट से पैदा होने वाले बच्चों को यह शिकायत ज्यादा होती है। क्योंकि ऑक्सिजन की सही मात्रा बच्चे के ब्रेन तक नहीं पहुंचने से ऐसा होने का डर रहता है। उन्होंने बताया कि इनमें से दस फीसदी केस ऐसे होते हैं, जिन्हें ठीक करने के लिए सर्जरी जरूरी होती है। मगर अभी तक देश के चुनिंदा डॉक्टरों ने मिलकर जो एप्लिेप्सी सर्जरी प्रोग्राम बनाया है, उसके तहत केवल 400 से 500 सर्जरी ही हर साल हो पाती हैं। अभी तक हैदराबाद के अलावा त्रिवेंदरम, बैंगलोर व दिल्ली के एम्स में ही यह सर्जरी हो रही हैं। पीजीआई में भी जल्दी ही यह सर्जरी शुरू होंगी।

डॉ. मानस ने बताया कि मिर्गी के जिन मरीजों को सामान्य रखने के लिए दो से ज्यादा दवा देनी पड़ती है, उनके लिए सर्जरी का विकल्प होता है। लेकिन फिलहाल तक सर्जिकल केसों में 70 फीसदी सफलता पाई गई है। यानि सर्जरी के बाद भी 30 फीसदी मरीजों को लंबा समय दवा खानी पड़ती है। जबकि 70 प्रतिशत मरीज एक साल तक दवा खाने के बाद बिल्कुल ठीक हो जाते हैं और उनकी दवा बंद कर दी जाती है। उन्होंने बताया कि इस सर्जरी में एक फीसदी मौत का डर रहता है, जबकि 2 फीसदी केस कांप्लिकेटेड होते हैं। दीप हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. डीपी सिंह ने बताया कि अभी तक पीजीआई में भी यह सर्जरी शुरू नहीं हो पाई है। बच्चे के दो साल का होने से पहले ही यह सर्जरी करा लेनी चाहिए। क्योंकि इसमें सफलता दर काफी ज्यादा है। आज यहां पहली सर्जरी की गई है। अगर रिस्पांस अच्छा रहा तो डॉक्टर मानस यहां लगातार सर्जरी के लिए आते रहेंगे। आज की सर्जरी वाली टीम में डॉ. मानस, डॉ. डीपी सिंह, डॉ. सुचंदा भट्टाचार्य, डॉ. लीनू गुप्ता भी टीम में शामिल रहे। हॉस्पिटल के डॉयरेक्टर डॉ. बलदीप सिंह व स्ट्रेटेजिक डायरेक्टर डॉ. समर्पण ने सर्जरी करने वाली टीम को बधाई दी।

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