प्रधानमंत्री उज्जवल योजना को लेकर कई गैस एजैंसियां शक के घेरे में – गैस कंपनियों द्वारा हो सकती है कार्यवाही


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प्रधानमंत्री उज्जवल योजना को लोकर अब कई गैस एजैंसियों के मालिक शक के घेरे में आ गए हैं। यह वह डीलर है, जो लाभपात्र परिवारों को फ्री घरेलु गैस सिलैंडरों का लाभ देने के लिए आंखें मुंदकर व कथित फर्जीवाड़े के तहत कनैक्शन काटते रहे हैं। माना कि लाभ अधिक से अधिक परिवारों को पहुंचाने के चक्कर में कंपनी अधिकारियों की आंखों में धूल झोंकते हुए चौखी कमाई की है। अब ऐसे सभी डीलरों से गैस कंपनियों ने वसूली करने के लिए कमर कस ली है, जिन्होंने नियमों को ताक पर रखकर लोगों को फ्री गैस कनैक्शन जारी किए या फिर फर्जीवाड़े के तहत कनैक्शनों को इधर-उधर किया हो। वहीं दूसरी ओर गैस कंपनियों द्वारा एजैंसी मालिकों को बी.सी. वर्ग व मल्टीपल गैस कनैक्शन धारकों से गैस सिलैंडर वापस लेने की बात कही है और ऐसा न करने की सूरत में कनैक्शनों की बनती राशि संबंधित गैस एजैंसियों के मालिकों के खाते में डालने की चेतावनी दे डाली है, जिसे लेकर गैस एजैंसियों के डीलरों ने फिलहाल दबी जुबान में ही सही, लेकिन गैस कंपनियों के अधिकारियों व मोदी सरकार को सवालों के कटहरे में ला खड़ा किया है।

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कई डीलरों ने बहती गंगा में जमकर लगाई डुबकियां

सूत्रों की माने तो कई गैस एजैंसियों के डीलरों ने सियासी नेताओं की शह पर भ्रष्टाचार की बहती गंगा में जमकर डुबकियां लगाई हैं व बड़े पैमाने पर अपने चहेतों के नाम पर गैस कनैक्शन काटकर अच्छी खासी कमाई भी की है, क्योंकि प्रधानमंत्री उज्जवल योजना के तहत गरीब व जरूरतमंद परिवारों को फ्री घरेलू गैस सिलैंडर बांटने का एक ऐसा भी दौर शुरू हुआ था, जिसमें प्रत्येक सियासी पार्टी के छोटे से लेकर बड़े नेता ने अपने वोट बैंक को मजबूत करने के लिए सरकार की उक्त योजना का दोनों हाथों से लाभ उठाया है। माना जा रहा है कि कई डीलरों ने तो योजना की आड़ में अपने ही वारे न्यारे कर लिए। सूत्र बताते हैं कि अगर उक्त डीलरों द्वारा जारी किए गए कनैक्शनों की सरकार द्वारा किसी प्राइवेट जांच एजैंसी से जांच पड़ताल करवाई जाती है तो करोड़ों रुपए का घोटाला सामने आने की संभावनाएं को नकारा नहीं जा सकता हैं।

गैस कंपनियों व डीलरों में बन सकती है टकराव वाली स्थिति

ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि कंपनियों द्वारा ऐसे सभी खप्तकारों के गैस सिलंैडर सरैंडर करवाने के लिए एजैंसी डीलरों को दिया गया तो निर्धारित समय गुजर जाने पर कंपिनयां डीलरों के खाते में गैस कनैक्शनों की बनती राशि डालती हैं तो इसके परिणाम स्वरूप संबंधित गैस कंपनियों व डीलरों में टकराव वाली स्थिति पैदा होने की संभावनाएं बन सकती हैं, क्योंकि जहां सरकार द्वारा लाभपात्र परिवारों को फ्री में दिए गए गैस सिलैंडर उक्त परिवार वापस लौटाना नहीं चाह रहे हैं। वहीं एजैंसी मालिक भी यह कहकर विरोध जता रहे हैं कि अगर कंपनियों ने उक्त लाभपात्र परिवारों से कनैक्शन वापस ही लेने थे तो पहले ही क्यों नहीं उनकी मांग को रद्द कर दिया गया और क्यों डीलरों पर दबाव डाला गया कि वह ज्यादा से ज्यादा लाभपात्रों को सरकार की योजना का हिस्सा बना फ्री घरेलु गैस सिलेंडर बांटे।

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