बरसाती पानी में डूबा सरकारी अनाज गोदाम, करोड़ों का गेहूं खराब होने की आशंका


लुधियाना – नगर में आज सुबह हुई कुछ समय की बरसात ने सरकारी अनाज गोदाम में खुले आसमान के नीचे स्टोर की गई करोड़ों रुपए के की गेहूं के खराब होने की आशंकाएं को जन्म दे दिया है।माना जा रहा है कि अगर बरसाती पानी में बुरी तरह से डूब चुकी उक्त गेहूं की बोरियों को विभागी अधिकारियों द्वारा जल्द की उचित ढंग से न संभाला गया तो गेहूं से खराब हो जाएगा। खाद्य व आपृति विभाग के गिल रोड स्थित पी.आर. सैंटर (अनाज गोदाम) में आज बरसाती पानी जमा होने के कारण गोदाम ने झील का रूप धारण कर लिया। पानी का लैचल इतना ऊंचा था कि गोदाम के कर्मचारियों को अनाज को पानी की मार से बचाने के लिए पानी को निकालने के लिए घंटों मोटर का सहारा लेना पड़ा। बावजूद इसके गोदाम में पड़ी गेहूं की हजारों बोरियां पानी में डूब गई हैं, जिसका मुख्य कारण गेहूं के चक्कों के नीचे लगाई गई लकड़ी के टुकड़ों की ऊंचाई नाममात्र होना बताया जा रहा है।

पानी में भीग चुकी गेहूं को डिपुओं में उतारने की चर्चा
इस दौरान यह चर्चा भी जोर पकडऩे लगी है कि आगामी कुछ दिनों में सरकार द्वारा राशन डिपुओं पर भेजी जाने वाली गेहूं के रूप में विभागीय अधिकारी बरसाती पानी में भीग चुकी गेहूं को उतार सकते हैं जोकि बाद में आटा दाल योजना से जुड़े लाखों लाभपात्र परिवारों के घरों तक पहुंच सकती है। इस सबंध में जब विभाग के कंट्रोलर राकेश भास्कर का पक्ष जानना चाहा तो उन्होंने अपने आपको किसी काम में व्यस्त होने की बात कही है।

समय पर क्यों नहीं अपनाई रणनीति
स‘चाई पर पर्दा डालने के लिए विभाग के कर्मी चाहे गेहूं के चक्कों को बरसाती पानी की मार से बचाने के लिए चक्कों पर तरपाल डाले जाने सबंधी तर्क दे रहे हैं, लेकिन जमीन पर पानी का लैवल कहीं ऊंचा होने से जो करोड़ों रुपए की गेहूं खराब होने की आशंकाएं पैदा हो गई हैं। ऐसे मेें सवाल पैदा होता है कि समय रहते कोई रणनीति क्यों नहीं अपनाई गई।
कंट्रोलर बेरी का कहना है कि स्टेेट राज सरकार की पालिसी के मुताबिक अनाज को खुले गोदामों में रखा जा सकता है, जबकि केन्द्र सरकार की पालिसी के मुताबिक अनाज को केवल कवर्ड अनाज गोदामों में ही स्टोर किया जा सकता है।

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