हजारीबाग में परिवार द्वारा की गई आत्महत्या में पुलिस को मिले 8 सबूत, हत्या की आशंका – जांच जारी


झारखंड के हजारीबाग में खजांची तालाब के पास सीडीएम अपार्टमेंट में शनिवार रात एक ही परिवार के 6 सदस्यों की मौत हो गई है। यह परिवार अग्रवाल समाज के महामंत्री सह कार्यकारी अध्यक्ष एवं ड्राई फ्रूट्स के थोक विक्रेता 70 वर्षीय महावीर महेश्वरी का था। परिवार अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 303 और 304 में रहता था। परिवार के सभी सदस्यों के शव अलग-अलग मिले। फ्लैट नंबर 303 के डाइनिंग हॉल के सोफे पर महावीर महेश्वरी की 7 वर्षीय पोती अन्वी उर्फ परी का शव था। सामने के कमरे में दीवान पर 10 वर्षीय पोते अमन का शव पड़ा था। उसका गला कटा था। उसी कमरे में महावीर महेश्वरी का शव पंखे से लटक रहा था। बगल के कमरे में महावीर की पत्नी 65 वर्षीया किरण महेश्वरी का शव पंखे के हुक से झूल रहा था। पास में दीवान पर महावीर की बहू 35 वर्षीया प्रीति अग्रवाल का शव पड़ा था। जबकि, अपार्टमेंट के नीचे मेनगेट पर महावीर के बेटे 40 वर्षीय नरेश अग्रवाल का शव पड़ा था। मृतक के छोटे भाई सांवरमल महेश्वरी ने बताया परिवार पर करीब 70 लाख रुपए का कर्ज था, जो बाजार में फंस गया था। इससे वे परेशान चल रहे थे।

साजिश के वे 8 साक्ष्य जिससे पूरे परिवार की हत्या होने का है शक

– फांसी के बाद गर्दन की हड्‌डी टूटने से गर्दन बाएं या दाएं मुड़ जाती है। यहां गर्दन पीछे की ओर लटकी हुई थी?
– जिंदा आदमी ऊंचाई से नीचे गिरता है, तो उसका सिर जमीन से टकराता है। नरेश के सिर पर चोट के निशान नहीं मिले, एक हाथ टूटा मिला, दोनों पैर के तलवे में छेद के निशान थे। जमीन पर खून के निशान भी नही थे।
– 15 दिन पहले एक दुर्घटना में इनकी रीढ़ की ह्ड्‌डी में चोट लगने से अभी ये सीढ़ी नहीं चढ़ पा रहे थे, फिर छत पर कैसे गए?
– शव में इथर की महक थी, यानी बेहोश कर हत्या की गई, गला काटने के बाद ब्लेड को बेसिन में धोया गया। यदि आत्महत्या ही करनी थी तो साक्ष्य मिटाया क्यों?
– जिस कुर्सी पर चढ़कर फंदे पर झूले वह आगे की ओर रखी थी। जबकी, कुर्सी पीछे की ओर पलट जानी चाहिये थी। लूंगी में खून कैसे लगा?
– पुलिस के अनुसार प्रीति ने फांसी लगाई फिर उसके शव को उतार किरण फंदे पर झूली। वहीं इथर की शीशी भी मिली। यदि प्रीति को बेहोश किया तो फंदे पर कैसे झूली?
– पुलिस को कुल 6 सुसाइड नोट मिले। सभी एक जगह क्यों नहीं रखे गए थे?
– सुसाइड नोट में तीन तरह के रंगों व तीन तरह की राइटिंग क्यों थी?

नजदीकियों के मुताबिक आत्महत्या करना नामुमकिन लग रहा

डॉक्टरों के अनुसार जिस तरह से मौत हुई वह तभी मुमकिन है, जब परिवार में कोई मानसिक विकृत हो। परिवार के मित्र सत्यनारायण अग्रवाल ने बताया कि शनिवार की रात 8 बजे महावीर से बात हुई थी। सब कुछ नार्मल था और वे खुश थे। ऐसे में आत्महत्या करना नामुमकिन लग रहा है। इस मामले में पुलिस की अब तक थ्योरी यह है कि नरेश ने दोनों बच्चों की हत्या करने के बाद छत से कूदकर आत्महत्या की है। एसपी मयूर पटेल के अनुसार इसीलिए नरेश पर हत्या का मामला दर्ज किया जाएगा। जबकि, खुद नरेश की मौत को एक्सपर्ट आत्महत्या मानने को तैयार नहीं हैं।

जिस नाम पर पॉवर ऑफ एटॉर्नी, उस पर भी संशय

कमरे से बरामद पॉवर ऑफ एटॉर्नी में लिखा है कि हमारी मौत के बाद फ्लैट का मालिक उमेश साव होंगे, जो एलआईसी ईएमआई का भुगतान करेंगे। उसी अपार्टमेंट के दूसरे तल्ले पर रह रहे उमेश साव का कहना है कि मुझे कोई जानकारी नहीं है। इधर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है कि किस उमेश साव के साथ पॉवर ऑफ एटॉर्नी का मामला जुड़ा है।

  • 1
    Share

LEAVE A REPLY