हाईकोर्ट ने ताजपुर रोड पर स्थित डाइंग इंडस्ट्री द्वारा फैलाये जा रहे प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए पंजाब सरकार को दिये निर्देश


 

Pollution

लुधियाना स्थित ताजपुर रोड की सेंट्रल जेल में बंद कैदियों की ओर से की गई शिकायत का संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को ताजपुर रोड पर डाइंगों की ओर से फैलाए जा रहे प्रदूषण की रोकथाम के लिए सख्त कदम उठाने की हिदायत दी है। उच्च न्यायलय ने एक जनहित याचिका पर पंजाब सरकार को पार्टी बनाते हुए एडवोकेट एचसी अरोड़ा को इस मामले की जांच के लिए चयनित किया। इसके पश्चात एचसी अरोड़ा ने 4 मई को लुधियाना आकर इंजीनियर कपिल अरोड़ा और इंजीनियर कुलवंत सिंह राय संग मौके का मुआयना किया। इस दौरान उन्होंने पाया कि एसटीवी की वर्किंग प्रणाली ठीक नहीं है। क्योंकि इससे पानी बिना ट्रीट किए हुए ही बुड्ढा दरिया छोड़ा जा रहा है। साथ ही साथ एक जगह अवैध कनेक्शन से डाइंगो द्वारा गंदा पानी छोड़ा जा रहा है। इसके कारण लोगों को सांस लेने में भी परेशानी हो रही है।

ट्रीटमेंट प्लांट में बरती जा रही अनियमितताएं

इस दौरान नए लगाए जा रहे ट्रीटमेंट प्लांट को देखा गया, तो पाया गया कि इसमें पानी को साफ करने के बाद दोबारा इस्तेमाल करने का कोई प्रावधान नहीं है। इस सभी जांच के बाद दोनों इंजीनियरों द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के आधार पर एडवोकेट एचसी अरोड़ा की ओर से अपनी रिपोर्ट में सुझाव देते हुए कहा कि सबसे पहले एसटीपी को दुरस्त करके उससे किए जा रहे साफ पानी को डाइंग इंडस्ट्री में दोबारा इस्तेमाल के लिए दिए जाना चाहिए और सभी समर्सिबल पंपों को हमेशा के लिए बंद कर देना चाहिए। इस मामले में हाईकोर्ट ने आज हुई सुनवाई में पीपीसीबी और प्रदेश सरकार को यह हिदायत दी कि अगले पंद्रह दिन के अंदर एडवोकेट अरोड़ा की रिपोर्ट का जवाब दें और मापदंडों को पूरा करने का काम करें।


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