पाक में इमरान की पार्टी के सांसद के पास है श्री गुरु गोबिंद सिंह जी की ये खास निशानी


लुधियाना – पाकिस्तान के विधानसभा एवं नेशनल असेंबली चुनाव में विजयी रही इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के टिकट पर सांसद चुने गए राय मोहम्मद मुरतजा इकबाल के पूर्वज लुधियाना की तहसील रायकोट के निवासी रहे हैं।विभाजन से पहले 1945 में पंजाब के तलवंडी राय (जिला लुधियाना) से विधायक रहे स्वर्गीय राय मोहम्मद इकबाल के पोते राय मोहम्मद मुरतजा पाकिस्तान के पूर्व मंत्री स्वर्गीय अबू राय अली नवाज के पुत्र और पूर्व सांसद अजीज उल्ला के भतीजे हैं। अजीज उल्ला वही शख्स हैं, जिन्होंने श्री गुरु गोबिंद सिंह जी की निशानी गंगासागर को संभाल कर रखा है। मुरतजा की जीत के बाद रायकोट में एक बाद फिर पुरानी यादें ताजा हो गई हैं।

रायकोट में राय परिवार के करीबी उत्तम चंद वोहरा के पोते एवं रिटायर्ड टीचर 83 वर्षीय जगदीश राय वोहरा ने मुरतजा को इस जीत पर बधाई दी और अच्छे राजनीतिक क रियर की कामना की।

वोहरा का मकान मोहम्मद मुरतजा के पूर्वजों की कोठी के ठीक सामने है। जब भी पाकिस्तान से राय परिवार का कोई भी शख्स आता है, तो वह वोहरा परिवार से जरूर मिलता है और पुरानी यादें ताजा होती हैं।

जगदीश ने बताया कि मुरतजा के चाचा राय अजीज उल्ला के पिता फकीर उल्ला एवं उनके परिवार के सदस्यों के लोगों के साथ काफी मधुर संबंध थे। राय परिवार ङ्क्षहदुओं के साथ भी मधुर रिश्ते रखता था। किसी भी खुशी के अवसर पर हिंदू परिवारों को खास तौर पर बुला कर उनको पार्टी की जाती थी और खाना बनाने वाले भी ङ्क्षहदू ही होते थे।

बंटवारे के बाद राय परिवार पाकिस्तान में टीचा वतनी शेखुपुरा में शिफ्ट हो गया। वहां से बाद में इंग्लैंड और फिर कनाडा भी चले गए। पाकिस्तान की राजनीति में राय परिवार काफी सक्रिय हैं। जगदीश ने कहा कि मुरतजा और उनके परिवार के सदस्यों से उनका लगातार संपर्क रहता है।

आज भी मौजूद है पुश्तैनी कोठी

रायकोट में आज भी मुरतजा के पूर्वजों की पुश्तैनी कोठी मौजूद हैं। अब उस कोठी में अनिवासी भारतीय दो भाई अपने परिवार समेत रहते हैं। इसके पास ही रायकोट पब्लिक स्कूल में बच्चों को शिक्षा दी जा रही है।

सेवा से खुश होकर दी थी निशानियां

राय परिवार की सेवा भावना से खुश होकर गुरु गोबिंद सिंह ने ने उनको गंगा सागर, लकड़ी की रहेल (पोथी खोलकर रखने वाला लकड़ी का स्टैंड) और एक खड्ग बख्शीश की थी। लकड़ी की रहेल जिसकी हालत काफी खस्ता थी, देश की बंटवारे के दौरान लुप्त हो गई और गुरु साहिब की ओर से मिली तलवार इस परिवार के माध्यम से इंग्लैंड की महारानी के पास भेज दी गई, जबकि गंगा सागर आज भी राय अजीज उल्ला खान के पास सुरक्षित है।

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