भारत को मिली एक ओर सफलता दुनिया में सबसे पहले तैयार की आयुर्वेदिक डेंगू की दवा, 3 अस्पतालों में ट्रायल रहा कामयाब


Dengue Fever

दुनिया भर में डॉक्टरों और विज्ञानियों के लिये समस्या बन चूका डेंगू बुखार अब भारत के लोगों को और तंग नही कर पायेगा क्योंकि भारत ने दुनिया में सबसे पहले डेंगू की दवा तैयार करने में कामयाबी हांसिल कर ली है| वहीं भारत में तैयार यह दवा पूरी तरह से आयुर्वेदिक है| बता दें की इस दवा का परिक्षण देश के तीन हस्पतालों में कामयाब रहा है| इस दवा को तैयार करने में कामयाबी भारतीय वैज्ञानिकों ने हांसिल की है| इस दवा की मरीजों पर की गई पायलट स्टडी भी सफल रही है। अब इस दवा के बाजार में उतारने से पहले ग्लोबल स्टैंडर्ड के तहत बड़े स्तर पर क्लीनिकल ट्रॉयल किए जा रहे हैं। उम्मीद है कि 2019 तक डेंगू के आम मरीजों के लिए यह दवा बाजार में उपलब्ध हो जाएगी। पूरी तरह से आयुर्वेदिक इस दवा को 7 तरह के औषधीय पौधों से तैयार किया गया है।

हर दिन दो टैबलेट, सात दिन का है कोर्स

– पायलट स्टडी में 90 मरीजों को जो दवा दी गई थी वह काढ़े के तौर पर लिक्विड फॉर्म में दी गई थी। लेकिन अभी जो क्लीनिकल ट्रायल चल रहे हैं उसमें मरीज को टैबलेट के फॉर्म में दवा दी जा रही है। दवा का डोज सात दिनों का तय किया गया है। दिन में दो बार एक-एक टैबलेट लेनी होगी। कीमत को लेकर कहा जा रहा है कि इस दवा के दाम बहुत ज्यादा नहीं होंगे।

सीसीआरएएस के वैद्यों ने 2 साल में बनाई दवा

– डेंगू की इस दवा को आयषु मंत्रालय के शोध संस्थान सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वेद (सीसीआरएएस) के वैज्ञानिकों ने बनाया है। दवा तैयार करने में सीसीआरएएस के एक दर्जन से अधिक वैद्य (विशेषज्ञ) को दो साल से ज्यादा का वक्त लगा है।
– पायलट स्टडी के परिणामों के बाद सीसीआरएएस अब इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के साथ मिलकर बलगाम और कोलार मेडिकल कॉलज में डेंगू मरीजों पर बड़े स्तर पर क्लीनिकल ट्रायल कर रहा है।
– तीन स्तर पर क्लीनिकल ट्रायल करने का निर्णय लिया गया है। क्लीनिकल ट्रायल सितंबर-2019 तक पूरा हो जाएगा। इसके बाद परिणामों का विश्लेषण किया जाएगा।

2019 में बाजार में आ सकती है डेंगू की दवा

– सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वेद के महानिदेशक, वैद्य प्रो. केएस धिमान ने कहा, ”दुनिया में पहली बार डेंगू बीमारी के इलाज के लिए दवा विकसित की गई है। सबसे बड़ी बात है पायलट स्टडी में इस दवा के कोई साइड इफेक्ट्स सामने नहीं आए हैं। अगले साल सितंबर तक क्लीनिकल ट्रायल पूरे हो जाएंगे। इसके बाद तय प्रोसिजर के तहत उस कंपनी को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की जाएगी, जो दवा को तैयार कर बाजार में लाने के लिए तैयार होगी।”

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