सरकारी अस्पताल में सफाई कर्मचारी बना डॉक्टर, मरीज के सिर में लगा दिए टांके


Sweeper
गुरदासपुर के सिविल अस्पताल में एक सफाई कर्मचारी 300 रुपये के लालच में डॉक्टर बन गया और मरीज के सिर पर लगी गंभीर चोट में टांके लगा दिए| सफाई कर्मचारी ने मरीज के साथ आए लोगों से कहा कि डरने की कोई बात नहीं है| उसे डॉक्टर ने टांके लगाने की ट्रेनिंग दी है| हालांकि टांके लगाने के बाद मरीज की हालत गंभीर हो गई और उसे अमृतसर रेफर कर दिया गया| पंजाब रोडवेज की बटाला वर्कशॉप में अनूप सिंह के सिर पर एक टायर का रिम उछलकर गिर गया| अनूप कुमार के सिर पर गहरी चोटें आई थीं| वर्कशॉप के कर्मचारी अनूप कुमार को सिविल अस्पताल बटाला की इमरजेंसी में ले गए| वहां मौके पर डॉक्टर मौजूद नहीं थे| कम्पाउंडर ने एसएमओ डॉ. संजीव भल्ला को इस बारे में जानकारी दी. एसएमओ ने कंपाउंडर को निर्देश दिए कि डॉक्टरी मदद देकर अनूप को अमृतसर रेफर कर दिया जाए|

कंपाउडर अनूप को इमरजेंसी वार्ड के एक कमरे में ले गए और कहा कि सिर पर टांके लगाएंगे जिससे खून बहना रुक जाएग| यह कहकर कंपाउडर भी वहां से चला गया. इतने में इमरजेंसी में एक सफाई कर्मचारी हाथ में धागा और सुई लेकर आया| उसने कहा कि वह टांके लगाएगा, लेकिन उसकी फीस 300 रुपये है| पहले फीस देगी होगी फिर टांके लगाए जाएंगे. उसने यहां तक कहा कि डरो मत इमरजेंसी के डॉक्टरों ने मुझे मरीजों को टांके लगाने की ट्रेनिंग दे रखी है. यह उसका रोज का काम है| अनूप की नाजुक हालत को देखते हुए साथियों ने 300 रुपये सफाई कर्मचारीको थमा दिए. जिसके बाद वह टांके लगाने लगा| सिविल सर्जन डॉ. किशनचंद का कहना है कि सफाई कर्मचारी का किसी मरीज को टांके लगाना सरासर गलत है. यह काम डॉक्टरों का है. मामले की जांच करवाई जाएगी और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी|

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