यह कैसा हाई अलर्ट – पंजाब पुलिस के कर्मचारीयों को न हथियारों की चिंता और न सुरक्षा का ध्यान


आतंकी जाकिर मूसा और सुरक्षा एजैंसियों द्वारा दिए आतंकी हमले के इनपुट कारण हाई अलर्ट चल रहा है, लेकिन रात को नजारा देख कर शहर की सुरक्षा चिंताजनक दिखाई गई। एंट्री प्वाइंट्स पर चैकिंग नहीं थी। नाकों पर पुलिस के जवान सोते हुए मिले। एक पुलिसकर्मी तो अपनी बंदूक टेबल पर छोड़कर सोता मिला। देर रात डेढ़ बजे से लेकर तड़के 4 बजे का हाल ऐसा था कि शहर में एंट्री करने वाले वाहनों की चैकिंग नहीं हो रही थी। केवल वडाला चौक पर ही गाड़ियों को रोककर चैक किया जा रहा था। इसके अलावा पी.ए.पी. चौक, पठानकोट चौक, कपूरथला चौक पर किसी प्रकार का नाका नहीं था।

गाड़ियों में सो रही थे पुलिस मुलाजिम

पी.ए.पी. चौक पर एक पुलिस की गाड़ी थी जिसमें 2 जवान थे लेकिन दोनों सो रहे थे। कैमरे की फ्लैश पडने पर एक मुलाजिम तो उठ गया। उस मुलाजिम ने ड्राइविंग सीट पर बैठे मुलाजिम को धक्का देकर अलर्ट भी किया लेकिन वह इतनी गहरी नींद में था कि उठ ही नहीं पाया। जहां-जहां पुलिस की गाड़ियां खड़ी थी ज्यादातर मुलाजिम उनमें बैठकर आराम फरमा रहे थे और चैकिंग बिल्कुल बंद थी। पठानकोट से आने वाले वाहन भी बिना किसी चैकिंग के ही शहर में प्रवेश हो रहे थे। मॉडल टाऊन का हाल यह था कि वहां पर एक मात्र मुलाजिम कुर्सी पर बैठा सो रहा था। उसकी बंदूक टेबल पर लावारिस हालत में थी। उस मुलाजिम को न तो होश था और न ही बंदूक चोरी होने का डर।

सुरक्षा के प्रति गंभीर नहीं जालंधर पुलिस

मॉडल टाऊन मार्कीट इलाके में एक बस जरूर खड़ी थी लेकिन सोए हुए मुलाजिम के अलावा वहां दूसरा कोई मुलाजिम नहीं था। रेलवे स्टेशन पर भी कोई पुलिसकर्मी नहीं था लेकिन दिखावे के लिए वहां एक पुलिस की बस जरूर खड़ी थी और सुरक्षा को लेकर वहां तैनात मुलाजिम बस के अंदर सोए हुए थे। हैरानी की बात है कि पुलिस अधिकारियों को भी सुरक्षा को लेकर कोई भी चिंता नहीं है। नाइट कवरेज कर रही टीम ने पूरे शहर में सुरक्षा का जायजा लेकिन पूरा शहर घूमने पर किसी भी नाके पर गाड़ी को रोककर चैक तक नहीं किया गया। ऐसी ही लापरवाही के चलते सी.टी. इंस्टीच्यूट के कश्मीरी छात्र ए.के.-56 व विस्फोटक सामग्री लेकर अंदर तक घुस गए और मकसूदां थाने में फैंके गए बम भी शहर में एंटर कर गए। यह भी सच है कि फोटो सैशन के लिए कभी-कभार पुलिस अधिकारी रोड पर आकर गाड़ियों की चैकिंग कर लेते हैं लेकिन शहर में सुरक्षा की असलियत यह है।


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