नगर निगम द्वारा बनाये गये अस्थायी नाइट शेल्टरों में नाकाफी हैं इंतजाम, फुटपाथों पर सोने को मजबूर बेघर


lack of facilities in temporary night shelters

इन दिनों कड़ाके की ठंड पड़ रही है और अधिकांश लोग अपने घरों में ठंड के मौसम में अपना समय गुजार रहें है पर कई ऐसे गरीब हैं जिनके पास रहने के लिए जगह नहीं है। वे खुले आसमान तले रहने के लिए मजबूर हैं। सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए आदेशों के तहत नगर निगम ने सर्दियों में बेघरों के लिए अस्थायी नाइट शेल्टर तो बना दिए। पर उनमें भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई है। इस कारण बेघर गरीब कड़ाके की ठंड में फुटपाथों पर सोने को मजबूर हैं। निगम ने जो दस अस्थायी नाइट शेल्टर बनाए हैं, उनमें न तो पूरे गद्दे हैं और न ही ठंड से बचने के लिए कंबल हैं। इससे साफ है कि नगर निगम ने सिर्फ खानापूर्ति के लिए यह नाइट शेल्टर बनाए हैं।

नगर निगम ने बस स्टैंड पुल के नीचे जो शेल्टर बनाया है उसमें सिर्फ छह गद्दे व दो कंबल रखे हैं। इसी तरह दुर्गा माता मंदिर के पास बने शेल्टर में 16 गद्दे रखे हैं और वहां पर सिर्फ तीन कंबल पड़े हैं। वहीं शेल्टर के अंदर गंदगी फैली हुई है। गद्दों पर धूल जमी हुई है। यही हाल बाकी के नाइट शेल्टरों का भी है। निगम ने पूरे शहर में 10 अस्थायी शेल्टर बनाए हैं जबकि चार स्थायी नाइट शेल्टर हैं। शहर में बेघरों की गिनती इतनी ज्यादा है कि यह इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। भारत नगर चौक से जगराओं पुल तक सैकड़ों की तादात में बेघर फुटपाथ पर सो रहे हैं। नगर निगम के एसई हरपाल सिंह भुल्लर ने कहा कि सभी अस्थायी नाइट शेल्टरों में गद्दे व कंबल रखे गए हैं। अगर वहां पर अब कंबल नहीं हैं तो दोबारा चेक करके कंबलों की व्यवस्था कर दी जाएगी।

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