पुलवामा आतंकी हमले के बाद उद्योगपतियों ने दिया पाकिस्तान को सख्त संदेश, नहीं करेंगे पाकिस्तान के साथ कारोबार


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जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले में 44 जवानों की शहादत के बाद जहां पूरा देश में उबाल में है, वहीं उद्योग जगत में भी गुस्से से भरा हुआ है। केंद्र सरकार द्वारा पाकिस्तान से मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा वापस लेने से उद्यमी गदगद हैं। उनका तर्क है कि इन हालात में वे किसी भी कीमत पर पाकिस्तान के साथ कारोबार नहीं करना चाहेंगे। कारोबार करने के लिए पूरा विश्व पड़ा है। साथ ही औद्योगिक संगठन इस हमले में शहीद हुए जवानों के परिवारों को आर्थिक सहयोग देने के लिए भी तत्पर हैं। भारत पाकिस्तान को कॉटन, डाई, केमिकल्स, सब्जी, आयरन एवं स्टील का निर्यात करता है। जबकि पाक से सीमेंट, लेदर, केमिकल, फल एवं मसालों का आयात किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि एमएफएन का दर्जा वापस लेने के बाद कारोबार पर कोई ज्यादा असर नहीं होगा। दोनों देशों के बीच 37 बिलियन डॉलर के कारोबार की क्षमता है, जबकि दोनों देशों के बीच आपसी कारोबार काफी कम है। इसमें अब और गिरावट आ सकती है।

एमएफएन का दर्जा वापस लेना सही निर्णय: रल्हन

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्टर्स आर्गेनाइजेशन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एससी रल्हन का कहना है कि देश सर्वोपरि है। कारोबार बाद में आता है। पाक से एमएफएन का दर्जा वापस लेने का केंद्र सरकार ने सही फैसला लिया है। यह काफी पहले हो जाना चाहिए था। क्योंकि पाक आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए लगातार कोशिशें कर रहा है। रल्हन ने कहा कि इस दर्जे के कारण पाक से न्यूनतम ड्यूटी पर माल आ रहा था।

पाक से नहीं होगा कोई कारोबार: गुनबीर सिंह

कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज पंजाब के पूर्व चेयरमैन गुनबीर सिंह का तर्क है कि दशहतगर्दी के माहौल में कारोबार की संभावना नहीं है। वाघा सीमा के जरिए सालाना 16800 करोड़ रुपये का कारोबार हो रहा है। यदि पाक भी भारत को एमएफएन का दर्जा देता तो यह कारोबार अरबों खरबों में हो सकता था। उन्होंने कहा कि पाक की नई इमरान खान की सरकार से भी हालात सुधर नहीं रहे हैं।

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