चिट्टे के नशे की तुलना में उपलब्ध सस्ता मेडिकल नशा भी युवा पीढ़ी की बरबादी का बड़ा कारण


देश की सुरक्षा प्रणाली पर गहरी चोट सरहद पार से आने वाला चिट्टा यानी हेरोइन ने युवा पीड़ी को बर्बादी की ओर धकेल दिया है जिसका अंत शायद मौत ही है। परन्तु इस सरहद पार से आने वाले नशे के इलावा शहर-शहर, गली-गली में बिकने वाला मेडिकल नशा भी पुलिस की सिरदर्दी का कारण बना हुआ है जिसके दलदल में आज की युवा पीड़ी धंसती ही चली जा रही है। अनेक बार दवा विक्रेताओं पर रेड कर कारवाई करने के बावजूद सरकार इन मेडिकल नशे के सौदागरों पर नकेल कसने में नाकाम साबित हुई है। आज तक जितनी भी करवाई हुई है उसमे ज़्यादातर छोटे रिटेल केमिस्ट ही पकडे गए जबकि बड़े मगरमच्छ पुलिस की गिरफ्त से बाहर ही रहे हैं।

बीते दिन भी लुधियाना की एस.टी.एफ. टीम ने एक आरोपी को गिरफतार कर उसके कबजे से 11 हजार 800 नशीली गोलीया वह 52 हजार रूपये भारतीय करंसी बरामद की है पुलिस के मुताबिक पकडा गया आरोपी पिछले 7-8 साल से नशे की गोलीया बेचने का धंधा करता आ रहा है और यह नशीली दवाइयां वह लुधियाना की पिंडी गली से सस्ते दामों मे खरीद कर आगे परचून मे महँगे दामों मे बेचता था। लुधियाना टीम इंचार्ज हरबंस सिह अनुसार दविदर सिह नामक आरोपी पहले पिंडी गली में दवाईओ की दुकान पर काम करता था और पिछले 7-8 सालो से अपने घर पर बिना लाईसेंस के दवाईआ बेच रहाथा। फिलहाल पुलिस ने आरोपी के कबजे से टरामाडोल, पारवनसपास के इलावा दूसरी नशीली दवाइयां बरामद कर मामला दर्ज कर अगली कारवाई शुरू कर दी है।

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