लुधियाना सैंट्रल जेल में नशे को लेकर एस.आई.टी ने किया बड़ा खुलासा, नशा छुड़ाने वाली दवाओं का हो रहा है गलत इस्तेमाल


Central Jail Ludhiana

लुधियाना की सैंट्रल जेल में नशे के एक बड़े खेल का खुलासा हुआ है। सरकार द्वारा जेल में बंद कैदियों को नशा छुड़ाने के लिए जो दवाएं भेजी जाती हैं, वह दवाएं उलटा नशे के तौर पर मिसयूज हो रही हैं। यह खुलासा पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर बनी स्पैशल इन्वैस्टिगेशन टीम (एस.आई.टी.) की जांच में हुआ है। हाईकोर्ट के आदेश पर गृह विभाग के एडीश्नल चीफ सैक्रेटरी ने एस.आई.टी. बनाई थी, जिसमें पटियाला डिवीजन के कमिश्नर वी.के. मीणा, पुलिस कमिश्नर लुधियाना आर.एन. ढोके, आई.जी. प्रमोद बान, डायरैक्टर हैल्थ डा. जसपाल कौर शामिल हैं। एस.आई.टी. ने 15 फरवरी को लुधियाना के डिप्टी कमिश्नर प्रदीप अग्रवाल, ए.डी.सी. (जनरल) इकबाल सिंह, सिविल सजर्न लुधियाना डा. हरदीप सिंह घई को साथ लेकर लुधियाना सैंट्रल जेल की चैकिंग की थी। इस दौरान एस.आई.टी. ने मैडीकल अफसर डा. स्वर्णदीप सिंह, डा. गुरबख्श ¨भडर, साइकेट्रिस्ट डा. विवेक गोयल, फार्मासिस्ट बलविंदर सिंह, सतीश कुमार, हरबंस सिंह, राकेश सिंगला के बयान लिए।

एस.आई.टी. की जांच के मुताबिक रिकार्ड को देखकर ऐसा लग रहा है कि जेल के अंदर बने डी-एडिक्शन सेंटर के प्रीस्क्रिप्शन रजिस्टर में 24 मई 2017 से 31 अगस्त 2017 तक की दवाओं की एंट्री बाद में की गई। उनके मुताबिक डा. स्वर्णदीप सिंह ने भी अपने बयान में दवाओं का रिकार्ड बाद में तैयार करने का आरोप लगाया है। वहीं सिविल अस्पताल के साइकेट्रिस्ट डा. विवेक गोयल ने भी एस.आई.टी. को बताया कि पैरोल, सजा पूरी करने या इलाज के लिए सिविल अस्पताल लाए जाने वाले कैदियों ने उनसे ब्यूप्रीनॉरफिन की मांग की, जब उन्होंने पूछा कि जेल में उन्हें यह दवाएं कैसे मिलती हैं तो उन्होंने जवाब दिया कि उन्हें जेल में अनप्रीस्क्राइब्ड मैडिसन के तौर पर यह दवाएं उपलब्ध हो जाती हैं। जांच के दौरान जेल के रिकार्ड में नशे के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं के रिकार्ड में भी भारी अनियमितताएं पाई गई हैं। इन सभी तथ्यों के आधार पर एस.आई.टी. भी मान रही है कि जेल के अंदर नशे के इलाज की दवाओं का नशे के तौर पर दुरुपयोग हो रहा है।

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