श्रद्धालुओं ने चढ़ाया दरबार साहिब व अन्य गुरुद्वारों में 30.45 लाख की पुरानी करंसी का चढ़ावा – पुरानी करंसी बनी एसजीपीसी के लिए मुसीबत


Banned Indian Currency

नोटबंदी की परेशानियां अभी तक खत्म नहीं हुई हैं। पुराने नोट जमा करवाने की समय सीमा खत्म होने के बाद भी श्रद्धालु श्री हरिमंदिर साहित समेत अन्य गुरुद्वारों में पुराने नोट चढ़ाते रहे। अब यह राशि 30.45 लाख तक पहुंच चुकी है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के पास पड़ी यह पुरानी करंसी मुसीबत बन गई है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने पुराने नोटों को बदलने से साफ इन्कार कर दिया है।

एसजीपीसी ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआइ) के गवर्नर को पत्र भेजा है, लेकिन आरबीआइ ने कोई जवाब नहीं दिया है। आरबीआइ ने पहले ही साफ कर दिया था कि 31 मार्च, 2017 के बाद एक भी पुराना करंसी नोट बदला नहीं जाएगा। सरकार ने आदेश दिए थे कि इसके बाद जिस किसी के पास भी पुरानी करंसी के नोट मिलते हैं, उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जायेगी। एसजीपीसी इन नोटों को बदलवाने की हर संभव कोशिश कर रही है।

गौरतलब है कि आठ नवंबर, 2016 की रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में 500 व 1000 रुपये के पुराने नोटों के लेन-देन पर रोक लगाने की घोषणा की थी। सभी लोगों व संस्थानों को 31 दिसंबर, 2016 तक पुराने नोट बैंक में जमा करवा कर इनको नई करंसी में बदलवाने को कहा गया था। बाद में यह समय सीमा 31 मार्च 2017 तक कर दी गई थी। इस दौरान एसजीपीसी सारी पुरानी करंसी अपने बैंक खातों में जमा करवा दी थी, लेकिन इसके बाद भी एसजीपीसी से संबंधित गुरुद्वारों व श्री हरिमंदिर साहिब में श्रद्धालु पुरानी करंसी चढ़ाते रहे।

एसजीपीसी ने नकद पुरानी करंसी लेने पर 9 नवंबर 2016 को ही रोक के आदेश जारी कर दिए थे। इसके बावजूद 31 मार्च, 2017 के बाद भी एसजीपीसी के पास विभिन्न गुरुद्वारों की गोलकों से पुरानी करंसी पहुंचती रही।

एसजीपीसी को अब भी आस

एसजीपीसी को आशा है कि उनकी पुरानी करंसी नई करंसी में तबदील हो जाएगी। एसजीपीसी के मुख्य सचिव डॉ. रूप ङ्क्षसह ने कहा, ‘हमने पुरानी करंसी से संबंधित सारा रिकॉर्ड संभाल कर रखा है। एसजीपीसी ने दूसरी बार आरबीआइ को पत्र भेजा है, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। उम्मीद है कोई रास्ता जरूर निकलेगा।


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