नासा द्वारा पार्कर सोलर प्रोब किया गया लांच, भारतीय मूल के वैज्ञानिक चंद्रशेखर ने रखी थी नासा के टच द सन मिशन की नींव


SolarProbe launch

नासा का पार्कर सोलर प्रोब सूर्य से 61 लाख किमी दूर कक्षा में स्थापित होगा। ये सूर्य से किसी भी यान की अब तक की सबसे करीबी दूरी होगी। अभी तक सूरज को आसानी से तभी देखा जा सका है, जब सूर्य ग्रहण के दौरान चंद्रमा उसे ढंक लेता है। लेकिन, टच द सन मिशन के जरिए सूर्य में होने वाली गतिविधियों को और करीब से देखा जा सकेगा।

पार्कर ने 31 की उम्र में सोलर विंड की खोज की – वैज्ञानिक पार्कर ने 1958 में सौर हवाओं की खोज की थी। उस वक्त उनकी उम्र 31 साल थी। उन्होंने बताया था कि सूर्य से आवेशित कण (चार्ज्ड पार्टिकल) लगातार निकलते रहते हैं और अंतरिक्ष में घूमते हैं। हालांकि, वैज्ञानिक समुदाय ने उनकी इस थ्योरी को मानने से इनकार कर दिया। वैज्ञानिकों का विचार था कि अंतरिक्ष बिल्कुल खाली है। इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आईआईएसईआर) के असोसिएट प्रोफेसर दिब्येन्दु नंदी ने न्यूज एजेंसी को बताया कि पार्कर ने अपनी रिसर्च खगोलीय जर्नल को दी थी, जिसे दो बार अलग-अलग समीक्षकों ने नकार दिया गया। पार्कर से इस संबंध में अन्य खोज लाने के लिए कहा गया था।

पार्कर की रिसर्च पर सुब्रमण्यन ने काम किया – नंदी ने बताया कि खगोलीय जर्नल के वरिष्ठ संपादक सुब्रमण्यन चंद्रशेखर ने समीक्षकों को नकार दिया। उन्होंने इस रिसर्च पर काम किया और इसे प्रकाशित करने का फैसला किया। चंद्रशेखर अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ के सोलर-स्टेलर एनवॉयरनमेंट ग्रुप के चेयरमैन भी थे। भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में काम करने के लिए 1983 में सुब्रमण्यन को नोबल पुरस्कार मिला था।

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