मेरे साथ लोगों ने खिंचवाई करीब 10 हजार फोटो, मैं किसी चावला को नहीं जानता – नवजोत सिंह सिद्धू


पाकिस्तान स्थित करतारपुर कॉरिडोर के शिलान्यास समारोह में शिकरत करने के बाद पंजाब के कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू बुधवार को वापिस लौट आए हैं। बाघा बॉर्डर पर पहुंचकर वह मीडिया से रूबरू हुए। खालिस्तानी के आतंकी गोपाल सिंह चावला के साथ उनकी तस्वीर को लेकर उन्होंने कहा कि समारोह में लोगों ने मेरे साथ पांच से दस हजार लोगों ने फोटो खिंचवाई हैं। मैं किसी चावले या चीमा को नहीं जानता। सिद्धू ने कहा कि करतारपुर कॉरिडोर बनने से सकरात्मक शुरूआत हुई है।

उन्होंने कहा कि श्री गुरू नानक देव जी के नाम पर नई शुरूआत हो। दोनों पंजाब के दिल जोड़ कर आया हूं और दोनों देशों के बीच दुश्मनी खत्म होनी चाहिए। सिद्धू ने करतारपुर कॉरिडोर को एक ऐतिहासिक फैसला बताया। बता दें कि बुधवार को खालिस्तान समर्थक आतंकी गोपाल सिंह चावला की नवजोत सिद्धू के साथ खिंची गई तस्वीर वायरल होने के बाद विवाद पैदा हो गया था। विपक्षी दलों ने उनकी तस्वीर को लेकर कई सवालिया निशान भी लगाए थे।

पाक सेना प्रमुख से हाथ मिलाता दिखा खालिस्तानी आतंकी…

यह आतंकी पाकिस्तान में सिख संगत का चेयरमैन भी है। चावला ISI का भी एजेंट है। सितंबर माह में करतापुर कॉरिडोर खोले जाने की बातचीत के बाद यह आतंकी करतारपुर में दिखा था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जब पंजाब के कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने पाक से कॉरीडोर खोलने का प्रस्ताव रखा था, तो करतारपुर में खालिस्तान समर्थकों की गतिविधियां बढ़ गई थीं। पाकिस्तान में कॉरिडोर के शिलान्यास के समारोह में आतंकी हाफिज सईद का करीबी और खालिस्तान समर्थक आतंकी गोपाल सिंह चावला जनरल कमर जावेद बाजवा के साथ हाथ मिलाता भी दिखा था।

खालिस्तान व कश्मीर की आजादी चाहता है यह आतंकी…

एक चैनल को दिए साक्षत्कार में आतंकी चावला ने कहा था कि हम इंडिया से अने खलिस्तान का हक छीनेंगे और कशमीर को भी आजाद करवा लेंगे। यह कहने में भी यह आतंकी हिचकिचाया नहीं की हम खालिस्तान व कश्मीर की आजादी और हिंदूस्तान की बर्बादी चाहते हैं। चैनल ने देश की खुफिया एजेंसियों के हवाले से यह भी खुलासा किया था कि ISI कॉरिडोर खुलने के बाद भारतीय सिखों को बरगला कर रेफरेंडम 20-20 को हवा देना चाहती है।

गोपाल सिंह ने हाल ही में वैसाखी के दिन पाकिस्तानी अफसरों के निर्देश पर भारतीय अफसरों को पंजा साहिब गुरुद्वारे में जाने से रोक दिया था। इससे पहले 12 अप्रैल को ट्रेन से रवाना हुए भारतीय तीर्थयात्री बॉर्डर के उस पार वाघा स्टेशन पहुंचे थे, तब भी अफसरों को उनसे मिलने से रोका गया था। ये अफसर प्रक्रिया के तहत तीर्थ यात्रियों की मदद के लिए उनसे मिलने गए थे।

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