सरकार द्वारा स्मार्ट सिटी योजना के लिये जारी फंड को खर्च करने में लुधियाना रहा पीछे, सूरत निकला आगे


Smart City Project

मोदी सरकार द्वारा स्मार्ट सिटी योजना के तहत पहली सूची में शामिल किए गए पंजाब का लुधियाना शहर केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए फंड को इस्तेमाल करने के मामले में फिसड्डी साबित हो रहा है। इस योजना के तहत लुधियाना को अब तक 196 करोड़ रुपए का फंड जारी हुआ है लेकिन लुधियाना ने इसमें से महज 12.45 करोड़ रुपए ही खर्च किए हैं। यह कुल जारी किए गए फंड का 6.40 फीसदी बनता है।

लुधियाना हौजरी का एक बड़ा केंद्र है और इसके मुकाबले देश के दूसरे बड़े केंद्र सूरत ने केंद्र सरकार द्वारा इस योजना के तहत जारी किए गए 291 करोड़ रुपए के फंड में से 290.75 करोड़ रुपए खर्च कर दिए हैं और सूरत का फंड खर्च करने के मामले में पहला नम्बर है और इस शहर ने खुद को स्मार्ट बनाने के लिए 99.90 फीसदी फंड खर्च कर दिया है। ऐसा नहीं है कि स्मार्ट सिटी का फंड खर्च न करने की सूची में लुधियाना अकेला फिसड्डी शहर है इसी सूची में पहला नम्बर गुवाहाटी का है जिसने महज 1.72 फीसदी फंड ही खर्च किया है।

Smart City Project Table

पंजाब ने नहीं दी 50 फीसदी मैचिंग ग्रांट

स्मार्ट सिटी के डायरैक्टर कुणाल कुमार का कहना है कि यह कंसैप्ट नया है और अधिकतर शहरों को वित्तीय संसाधन जुटाने के लिए स्पैशल पर्पज व्हीकल (एस.पी.वी.) बनाने में ही 12 से 18 महीने का समय लग गया। इसके अलावा इस प्रक्रिया में कंसल्टैंट और माहिरों की मदद ली जानी थी। इनके जरिए ही विकास की परियोजनाओं के डिटेल प्रोजैक्ट रिपोर्ट बनाए जाने थे। हालांकि कुछ शहरों ने इस मामले में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। इस मामले में सूरत पिछले 2 साल से लगातार टॉप पर चल रहा है। अलग-अलग शहरों के नगर निगम इस योजना पर अलग-अलग तरीके से काम कर रहे हैं और इस काम में उनका निजी अनुभव भी काम आ रहा है।

दाहरण के तौर पर सूरत की नगर निगम का अपना बजट ही 5 से 6 हजार करोड़ रुपए का है। लिहाजा सूरत को इस मामले में काम करने का बेहतरीन अनुभव है। जिसके आधार पर सूरत इस दिशा में शीर्ष पर जा रहा है। यदि हम बात पंजाब की करे तो लुधियाना देश के अन्य शहरों के मुकाबले छोटा शहर है और इस शहर के पास बहुत ज्यादा माहिर लोग नहीं है। इस तथ्य के अलावा पंजाब सरकार ने इस योजना के तहत दी जाने वाली 50 फीसदी मैङ्क्षचग ग्रांट नहीं दी है और लुधियाना नगर निगम वित्तीय संसाधनों को जुटाने में सफल नहीं हो पाया है। लिहाजा लुधियाना इस मामले में पिछड़ा गया है। इसके बावजूद इस सूची में शामिल किए गए शहर योजना को गंभीरता के साथ लागू करने में जुटे हैं।

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