पंजाब में NGT के आदेशों की उड़ रही है धज्जियां, 1400 ईंट-भट्ठे हवा में फैला रहे प्रदूषण


पंजाब में 1400 से ज्यादा ईंट-भट्ठा मालिकों ने नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एन.जी.टी.) के आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए ईंटों का उत्पादन शुरू कर दिया है। एन.जी.टी. ने अपील नंबर-1541/2018 में पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड को आदेश दिया है कि बिना जिग-जैग तकनीक के भट्ठे न चलने दिए जाएं लेकिन इन आदेशों की परवाह किए बिना बीती 1 फरवरी से पंजाब में बिना नई तकनीक लगाए पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड (पी.पी.सी.बी.) की नाक के नीचे भट्ठे को चालू कर दिया गया है।

पंजाब में करीब 2700 भट्ठे हैं। इनमें से 500 से ज्यादा भट्ठा मालिकों ने जिग-जैग तकनीक लगा ली है और तकरीबन 800 भट्ठे इस नई तकनीक को लगाने की शुरूआत कर चुके हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि एक माह के भीतर इस जिग-जैग तकनीक के साथ ये भट्ठे भी ईंटों का उत्पादन शुरू कर देंगे लेकिन बाकी के करीब 1400 में से अधिकतर भट्ठा मालिकों ने बिना किसी डर के काम शुरू कर दिया है और जमकर काला धुआं हवा में उड़ा रहे हैं। भट्टा मालिकों के पंजाब में 2 ग्रुप हैं जिसमें एक ग्रुप वह है जिसने जिग-जैग तकनीक लगाकर काम शुरू कर दिया है व दूसरा ग्रुप इस तकनीक के विरोध में है। पूछे जाने पर जवाब दिया गया कि यह जिग-जैग तकनीक लगाने के लिए कम से कम 65 लाख रुपए का खर्चा आता है और यह तकनीक कामयाब नहीं है जबकि पहले ग्रुप के मुताबिक ज्यादा से ज्यादा खर्च 15 से 20 लाख रुपए है। उधर पी.पी.सी.बी. के अधिकारी नई तकनीक न लगाने वालों को पकडऩे की बजाय उनके साथ हमदर्दी से पेश आ रहे हैं।

पी.पी.सी.बी. के अनुसार सिर्फ 22 भट्ठे इलीगल

पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के अधिकारियों से जब पूछा गया कि एन.जी.टी. के आदेश के बाद आपने क्या कार्रवाई की तो उनका जवाब हैरान करने वाला था। करीब 1400 भट्ठे बिना जिग-जैग तकनीक के चल पड़े हैं और पी.पी.सी.बी. के पास सिर्फ 22 का ही आंकड़ा पहुंचा है। इनकी फाइलें कहां हैं इसका जवाब भी किसी अधिकारी के पास नहीं है। बता दें कि लाइसैंसिंग अथॉरिटी फूड एंड सप्लाई विभाग होता है। यदि भट्ठे पर्यावरण के लिहाज से सही नहीं चल रहे हों तो उनका लाइसैंस रद्द करने के लिए पी.पी.सी.बी. इन्हें कहता है। मजेदार बात यह है कि 22 फाइलों में से भी आज तक पी.पी.सी.बी. ने डिस्ट्रिक्ट फूड एंड सप्लाई कंट्रोलर को केवल एक एस.पी. ब्रिक्स नामक भट्ठे का लाइसैंस रद्द करने के लिए कहा है। पी.पी.सी.बी. प्रदूषण को कितना गंभीरता से ले रहा है इसका अंदाजा उनकी इस कार्रवाई से लगाया जा सकता है।

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