अपनी गाड़ी में भरवाने जा रहे हैं पैट्रोल-डीजल तो हो जाएं सावधान, तेल कम्पनियों द्वारा घोषित तेल दरों में है काफी फर्क


Petrol Pump

अगर आप अपनी गाड़ी में किसी भी पैट्रोल पम्प से पैट्रोल या डीजल भरवाने जा रहे हैं तो जरा सावधान हो जाएं। पहले पम्प की मशीन व रेट बोर्ड पर डिस्पले की तेल की कीमतों पर एक बार जरूर नजर दौड़ाएं, क्योंकि यहां विभिन्न तेल कम्पनियों से संबंधित पैट्रोल पम्पों पर आपको पैट्रोल-डीजल की कीमतों में एक बड़ा अंतर देखने को मिलेगा। देश की 3 प्रमुख पैट्रोलियम कम्पनियों हिन्दुस्तान पैट्रोलियम, भारत पैट्रोलियम कार्पोरेशन व इंडियन ऑयल कार्पोरेशन से संबंधित पैट्रोल पम्प हैं उक्त तीनों तेल कम्पनियों के पैट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में एक-दूसरे से नहीं मिलती है, बल्कि इनमें मौजूदा दौर में एच.पी. व बी.पी.सी.एल. कंपनी द्वारा बिक्री किए जा रहे डीजल की कीमतों में तो करीब 15 पैसे प्रति लीटर तक का बड़ा अंतर है, जबकि पैट्रोल में यह 18 पैसे प्रति लीटर का आंकड़ा छू रहा है। इसे सीधे तौर पर ग्राहकों की पॉकेट में बड़ी सेंधमारी का नाम दिया जाए तो यह बात शायद गलत नहीं होगी।

भ्रम की स्थिति पैदा कर रहा तेल की कीमतों में अंतर

पैट्रोल पम्पों पर पैट्रोलियम पदार्थों की विभिन्न कीमतों को लेकर आम पब्लिक में भ्रम वाली स्थिति पैदा होती जा रही है। हकीकत यह है कि उक्त तीनों तेल कम्पनियों के अधिकारी कीमतों में अंतर को लेकर अपना-अपना तर्क रख रहे हैं। अब अगर मान भी लिया जाए कि यह तर्क ठीक है तो इन सब के पीछे आम पब्लिक का क्या लेना-देना है। ऐसे में चौंकाने वाली बात यह है कि इस बात की आम जनता को भनक तक भी नहीं है।

Petrol Pump Metter

तेल कम्पनियों की आपसी सहमति से ही किया गया है कीमतों में फेरबदल

इस बाबत एक पैट्रोलियम कंपनी के आलाधिकारी ने बताया कि अगर तीनों तेल कम्पनियों के पैट्रोलियम पदार्थों (पैट्रोल-डीजल) की कीमतें एक समान रहेंगी तो ऐसे में तेल कम्पनियों पर कीमतों की मनोपली करने जैसे इलजामात लग सकते हैं। इसलिए तीनों कम्पनियों की आपसी सहमति के साथ ही कीमतों में मामूली फेरबदल किया गया है। कुछ वर्ष पहले जब डीजल की कीमतों पर सरकार का निरंतर (अंडर कंट्रोल) था तब तो कीमतें सभी पम्पों पर एक समान थीं। उन्होंने इस पर बताया कि अब कीमतें डी-कंट्रोल (सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर) होने के कारण तेल की कीमतों में अंतर है। अधिकारी द्वारा दिए तर्क से यह बात साबित होती है कि दोनों ही हालातों में आम आदमी को ही अंजाम भुगतना पड़ेगा।

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