सतीश चन्द्र धवन राजकीय महाविद्यालय में होने वाले यूथ फेस्टिवल के बारे में हुआ प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन


Press Conference Regarding Youth Festival Held in SCD College in Ludhiana

लुधियाना – सतीश चन्द्र धवन राजकीय महाविद्यालय में आज प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन किया गया. यह कांफ्रेंस दिनांक 02 से 05 अक्टूबर तक महाविद्यालय में होने वाले यूथ फेस्टिवल पर केन्द्रित रहा. महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. धर्म सिंह संधू, पंजाब विश्वविद्यालय के डायरेक्टर यूथ वेलफेयर डॉ. निर्मल जोहरा तथा डॉ. कमल किशोर(कार्यक्रम सचिव) ने प्रैस को संबोधित किया और सम्बंधित कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी दी. प्राचार्य डॉ. संधू ने कहा कि पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ द्वारा हर वर्ष इस प्रकार के आयोजन करवाए जाते हैं और उन्हें ख़ुशी है कि इस बार यूथ फेस्टिवल लुधियाना जोन-ए के आयोजन की जिम्मेदारी उन्हें दी गयी है. उन्होंने कहा कि ऐसे फेस्टिवल में हर कॉलेज से सैंकड़ों की संख्या में विद्यार्थी अलग-अलग प्रतियोगिता में हिस्सा लेने आते हैं और अपनी विशिष्ट प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं. विद्यार्थियों की संख्या और प्रतियोगिताओं से सम्बंधित आवश्यक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए महाविद्यालय द्वारा जोर-शोर से तयारी की जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की समस्याओं का सामना न करना पड़े. फेस्टिवल की तैयारी को लेकर पूरा सतीश चन्द्र धवन महाविद्यालय परिवार अथक प्रयास में रत है. प्राचार्य ने कहा कि यूथ फेस्टिवल पंजाबी लोकधारा और सभ्याचार से सम्बंधित विषयों को विस्तारपूर्वक निखरेगा और पुनः जागृत करेगा जो कि वैश्वीकरण की मार से विलुप्त होता जा रहा है.

आज की नयी पीढ़ी आज की सभ्याचार के बारे में कुछ हद तक अनजान है. डॉ. संधू ने इस फेस्टिवल का मुख्य उद्देश्य नयी पीढ़ी को अपने संस्कृति के प्रति जोड़ने की पहल बताया. उन्होंने कहा कि इस प्रकार के फेस्टिवल से युवाओं को अपने विलुप्त होती संस्कृति से पहचान होती है; जैसे लोक खिलौने, गुद्दियाँ-पटोले, मिटटी के खिलौने, खिद्दो बनाना आदि. इसके अलावे जीवन में व्यवहारिक तौर पर उपयोगी चीजें जैसे- पीढियां, रस्से, इन्नु, छिक्कू, परांदे, नाले, टोकरियाँ आदि कैसे बनाए जाते हैं, इसके सम्बन्ध में पता चलता है. इस प्रकार के युवक मेले में विद्यार्थियों के साहित्यिक रुचियों को उभारा जाता है. उन्होंने कहा कि ऐसे युवक मेले के माध्यम से विद्यार्थी न सिर्फ पंजाबी संस्कृति बल्कि भारतीय संस्कृति के अन्य पहलुओं से भी रु-बी-रु होते हैं; जैसे – क्लासिकल गायन आयर क्लासिकल डांस, फाईन आर्ट्स के अलावा देश के अलग-अलग प्रान्तों में प्रचलित लोक-नाच के बारे में भी जानकारी मिलती है.

पंजाब विश्वविद्यालय के डायरेक्टर यूथ वेलफेयर डॉ. निर्मल जोहरा जी नने अपने संबोधन में बताया कि पंजाब विश्वविद्यालय अपने 204 एफिलियेटेड कॉलेजों और 4 रीजनल सेंटरों को कुल 12 ज़ोन में बांटकर एक महीने में ही युवक मेले का आयोजन करते हैं जिसमे कुल अधिकतम 63 इवेंट्स होते हैं जिसमे कोई कॉलेज अधिकतम 59 इवेंट्स में सहभागी बन सकता है. इसमें किसी भी कॉलेज के अधिकतम 160 विद्यार्थी ही हिस्सा ले सकते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे युवक मेले के माध्यम से कई विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बनाई है. उन्होंने श्रीमती सुषमा स्वराज, श्री मनीष तिवारी, आयुष्मान खुराना आदि का नाम लेते हुए बताया कि इन लोगों ने अपनी पहचान ऐसे युवक मेले में अपनी विशिष्ट प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए ही बनाई है. उन्होंने कहा कि भारत सरकार और पंजाब विश्वविद्यालय युवकों के बहुमुखी विकास को लेकर काफी सजग है और इस क्षेत्र में छात्रवृति आदि की व्यवस्था करते हुए युवाओं को प्रोत्साहित कर रही है. उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष से पंजाब विश्वविद्यालय और इससे से संबद्धित संस्थानों में दाखिला हेतु अतिरिक्त सीट की व्यवस्था की गयी है. केंद्र सरकार की विशेष पहल को ध्यान में रखते हुए इस बार युवक मेले का आयोजन 2 अक्तूबर से तो किया ही जा रहा है, इसके साथ-साथ ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की थीम पर पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता का आयोजन भी इसी दिन किया जा रहा है. कार्यक्रम सचिव डॉ. कमल किशोर ने बताया कि दिनांक 02 से 05 अक्टूबर तक चलने वाले इस यूथ फेस्टिवल लुधियाना ज़ोन-ए में कुल 14 कॉलेजों की टीम हिस्सा ले रही है और इसके लिए महाविद्यालय में चार वेन्यू निर्धारित किये गये हैं जहां सभी प्रतियोगिताओं को सुचारू रूप से आयोजित हो सके. प्रतिभागियों द्वारा तैयार सामग्रियों की प्रदर्शनी की व्यवस्था भी की गयी है ताकि विद्यार्थी उससे भी रु-ब-रु हो सकें.

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