पंजाब सरकार ने 34 साल से बंद पड़े स्टूडेंट इलेक्शन फिर से शुरू करवाने का लिया फैंसला


Punjab Government decided to review Student Elections

पंजाब सरकार ने 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद राज्य में बंद पड़े स्टूडेंट इलेक्शन को दौबारा से शुरू करने का फैंसला लिया है कल पंजाब विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण के बाद धन्यवाद प्रस्ताव पेश करते हुए सीएम कैप्टन ने यह एलान किया। इस दौरान मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने बताया की राज्य के कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज के आगामी अकादमिक सेशन से राज्य में स्टूडेंट इलेक्शन करवाए जाएंगे। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मुताबिक, कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज में सितंबर में स्टूडेंट चुनाव कराए जाने की संभावना है।

पंजाब में 1984 में हुए ऑपरेशन ब्लूस्टार के बाद स्टूडेंट चुनाव नहीं कराए गए। तब होम डिपार्टमेंट का कहना था कि अभी राज्य में स्टूडेंट चुनाव कराना सही नहीं है। इससे माहौल खराब हो सकता है। इसी के चलते पिछले 35 साल से स्टूडेंट इलेक्शन बंद थे। हालांकि, अभी भी स्टूडेंट इलेक्शन को लेकर राज्य में लोगों की राय अलग-अलग है। कई लोगों का मानना है कि राजनीति को समझने और स्टूडेंट्स को राजनीतिक तौर पर जागरूक करने के लिए स्टूडेंट इलेक्शन जरूरी हैं। कुछ लोग मानते हैं कि स्टूडेंट इलेक्शन विद्यार्थियों के अकादमिक करिअर में हिंसा का माहौल पैदा करने के लिए जिम्मेदार हैं।

राज्य में 6 बड़ी यूनिवर्सिटी, जहां के चुनाव रखते मायने

बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ एंड मेडिकल साइंस (कोटकपूरा), गुरुनानक देव यूनि. (अमृतसर), गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंस यूनि. (लुधियाना), पंजाब एग्रीकल्चर यूनि. (लुधियाना), पंजाब टेक्निकल यूनि. (जालंधर) और पंजाबी यूनिवर्सिटी, (पटियाला) के चुनाव प्रमुख होते हैं। इसके अलावा करीब 276 कॉलेज भी हैं।

इन तीन दलों में हमेशा रहता मुख्य मुकाबला

पंजाब में स्टूडेंट इलेक्शन होने पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी), स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया (एसओआई) और नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई ) में मुख्य मुकाबला रहेगा। इनमें से एबीवीपी भाजपा, एसओआई अकाली की और एनएसयूआई कांग्रेस की इकाई है।

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