लुधियाना में शिक्षा विभाग द्वारा 10वीं की परिक्षा में 100 प्रतिशत रिजल्ट देने वाले 61 सरकारी स्कूलों के 600 शिक्षक किये गये सम्मानित


 

Six Hundred Teachers of Government Schools Honored by Education Department of Punjab For Brilliant Performance in 10th Class Result

पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा घोषित किए गए दसवीं कक्षा के परिणाम में इस बार सरकारी स्कूलों का शानदार प्रदर्शन रहा। शिक्षा विभाग भी परिणामों से गदगद है। इसी के तहत जिला शिक्षा विभाग ने मालवा खालसा सीनियर सेकेंडरी स्कूल मॉडल ग्राम कोचर मार्केट में जिले के उन सभी सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपलों व हेडमास्टर्स को प्रशंसा पत्र से सम्मानित किया गया, जिनके स्कूल का दसवीं कक्षा का परिणाम सौ प्रतिशत रहा। इनमें 61 स्कूलों के साइंस, सामाजिक शिक्षा, गणित, अंग्रेजी, पंजाबी व हिंदी पढ़ाने वाले करीब 600 शिक्षक शामिल थे।

डिप्टी स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर (डीएसपीडी) सुभाष महाजन ने शिक्षकों को दो अलग-अलग सेशन में प्रशंसा पत्र दिए। पहले उन्होंने सुबह दस से एक बजे तक तीन सौ शिक्षकों को और फिर दो से छह बजे तक शिक्षकों को प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया।

सरकारी स्कूलों के बेहतर परिणाम लाने का सफलता का मंत्र

सुना डिप्टी स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुभाष महाजन ने दोनों सेशन में शिक्षकों से बेहतर रिजल्ट लाने के गुर भी जाने। उन्होंने एक-एक स्कूल के हेड मास्टरर, ¨प्रसिपल को स्टेज पर बुलाया। उन्होंने शिक्षकों से पूछा कि सौ प्रतिशत रिजल्ट लाने के लिए उन्होंने बच्चों को किस तरह से पढ़ाई करवाई। इस पर गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल माधोपुरी के शिक्षकों ने बताया कि परीक्षाओं से चार माह पहले से ही वह स्कूल टाइम के बाद एकस्ट्रा क्लास लगवाकर विद्यार्थियों की तैयारी करवा रहे थे। इसके अलावा छुट्टी वाले दिन भी एकस्ट्रा क्लासें लगाई गईं। इसी तरह अन्य स्कूलों ने भी अपनी सक्सेस स्टोरी बयां की जिसे सुनकर डीएसपीडी ने खूब प्रशंसा की।

राज्य में 10वीं में थर्ड रहने वाली मजदूर की बेटी सोनी को किया सम्मानित

डीएसपीडी सुभाष महाजन व डीईओ स्वर्णजीत कौर ने पीएसईबी दसवीं कक्षा के परिणाम में राज्य में तीसरा स्थान हासिल करने वाली सरकारी मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल मिल्लरगंज ढोलेवाल की छात्रा सोनी कौर को भी सम्मानित किया। सुभाष महाजन ने कहा कि सोनी के पिता मजदूरी करते हैं और घर में पांच भाई-बहन हैं। घर में आर्थिक तंगी भी रहती थी। इसके बाद भी सोनी ने जिस तरह से दिन रात एक करके पढ़ाई कर राज्य में तीसरा स्थान हासिल किया, उससे सरकारी स्कूल के हर बच्चे को सीख लेनी चाहिए।


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