देश में पहली बार तारों पर चलेगी पॉड टैक्सी, दिल्ली-गुड़गांव प्रोजेक्ट पर डेढ़ महीने में होगा काम शुरू


POD Taxi Service

दिल्ली के धौलाकुआं से मानेसर तक मेट्रिनो पॉड टैक्सी का काम डेढ़ महीने में शुरू हो जाएगा। यह टैक्सी तारों के जरिए हवा में चलेगी। इसके लिए तीन कंपनियों के टेंडर आ चुके हैं। इन पर मंथन चल रहा है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने यह जानकारी गुड़गांव में एक निजी कार्यक्रम के दौरान दी। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार दिल्ली-जयपुर, दिल्ली-चंडीगढ़ रूट पर डबल डेकर बस चलाने पर भी विचार कर रहा है, इसमें फ्लाइट की तरह सुविधाएं मिलेंगी।

– पॉड टैक्सी 4 से 6 सीटर ऑटोमेटिक व्हीकल है, इसे बिना ड्राइवर और कंडक्टर के ऑपरेट किया जाता है। गुड़गांव में ये एक तरह से ऑटो रिक्शा का काम करेगी। इसमें सफर करते हुए न तो रेड सिग्नल मिलेगा और न ही ट्रैफिक जाम।
– यह चार्जेबल बैटरी से चलती है यानी पेट्रोल-डीजल की जरूरत नहीं होगी। आमतौर पर यह दो तरह की होती है- ट्रैक रूट पर चलने वाली और केबिल के सहारे हैंगिग पॉड। जापान में इसका खूब चलन है।
– टैक्सी पूरी तरह से कम्प्यूटर सिस्टम से चलती है। इसमें बैठने के बाद मुसाफिरों को ‘टचस्क्रीन’ पर उस जगह का नाम टाइप करना होता है जहां उन्हें जाना है। तय स्टेशन आते ही टैक्सी रुकती है और गेट अपने आप खुल जाते हैं।

सरकार द्वारा पीआरटी कॉरिडोर के लिए भी हो चुका है एलान

– बता दें कि दिल्ली से गुड़गांव के बीच 60 किलोमीटर लंबा पीआरटी कॉरिडोर बनना है। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पहले इसे गुड़गांव के राजीव चौक से सोहना रोड के बीच बनाया जाएगा। पीआरटी कॉरिडोर पर पॉड इलेक्ट्रिक टैक्सियां चलेंगी। ये रोपवे की तरह तारों के जरिए हवा में चलती हैं।
– इस टैक्सी का किराया मेट्रो किराए के आसपास ही रखा जा सकता है। फिलहाल, पीआरटी के तहत 24 घंटे सर्विस देने की योजना है। गडकरी देश में 100 स्थानों पर पीआरटी कॉरिडोर बनाने की बात कह चुके हैं। पहाड़ी इलाकों में भी ऐसे कॉरिडोर बनाए जाएंगे।

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