गांववालों ने नहीं दी आसिफा की लाश को दफनाने की जगह, गांव से 8 किलोमीटर दूर दफनाई गई थी आसिफा की लाश


villagers did not give asifa a place to get buried

कठुआ के रसाना गांव से करीब आठ किलोमीटर दूर 1 एकड़ जमीन पर लहलहाती गेहूं की फसल और उसी जमीन के एक कोने पर है आसिफा की कब्र। कब्र के दोनो छोर पर बड़े-बड़े पत्थर रखे हुए हैं जो इस बात का संकेत के तौर पर स्थापित किये गये हैं कि यह कब्र आसिफा की है क्योंकि कब्र को अभी पक्का नहीं किया गया है। आसिफा का जनवरी में सामूहिक दुष्कर्म के बाद कत्ल कर दिया गया था।

उसके रिश्तेदार के अनुसार, हमारी परम्परा है कि हम तुरंत कब्र को पक्का नहीं करते हैं। हम इसे पक्का करेंगे जब आसिफा के पिता अपने मवेशियों के साथ पहाड़ों से वापिस आ जाएंगे। आसिफा का शव जनवरी में मिला था और उसके पालक पिता, जिन्होंने बचपन में ही आसिफा को गोद ले लिया था, की इच्छा थी कि आसिफा को वहीं दफन किया जाए यहां उसके तीन बच्चे और आसिफा की मां दफन है। परन्तु रसाना गांव के लोगों ने उन्हें ऐसा नहीं करने दिया और कहा कि यह जमीन किसी मुस्लिम परिवार की नहीं है।

गांववालों ने किया जमीन देने से इन्कार

आसिफा की दादी ने बताया, कब्र आधी खोदी जा चुकी थी कि तभी गांववाले आ गए और उन्होंने कहा कि वे बच्ची को यहां दफन नहीं करने देंगे। आसिफा के पालक पिता ने यह जमीन दशक पहले गांववाले से खरीदी थी पर कागज नहीं बनवाए थे और इसलिए उन्हें जमीन वापिस लेने का मौका मिल गया। गांववालों ने कहा कि यह जमीन बकरवालों की नहीं है। इतने वर्षों से आप लोग गैर कानूनी तरीके से अपने रिश्तेदारों को यहां दफन करते रहे हो।

गांव से दूर किया दफन

जनवरी की ठंड और शाम 6 बजे का समय था। रिश्तेदारों ने बच्ची का शव उठाया और उसे रसाना से आठ किलोमीटर दूर कनाह गांव ले आए। वहां एक रिश्तेदार ने आसिफा की छोटी से कब्र के लिए अपनी जगह दी। आसिफा का पिता बच्ची को छोडक़र वहां से नहीं जाना चाहता था और माता-पिता सुबह तीन बजे तक ठंड में कब्र के पास बैठे रहे।

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