एक विवाह ऐसा भी, जिसने खोल दी हर किसी की आंखें


A Marriage , which Opened The Eyes of Everyone

Mairrege

समाज में इस समय जहां एक तरफ दहेज व शगुन लेने की लालसा लोगों के अंदर दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, वहीं पर कुछ लोग ऐसे भी हैं जो समाज के लिए प्रेरणा स्रोत्र बन रहे हैं। वह ऐसे अनुकरणीय कार्य करते हैं जिससे समाज को कुछ न कुछ सीख अवश्य मिलती है।
लुधियाना में कोठी नं.-1812, गुरु नानक देव नगर (हैबोवाल) वासी आशु गुप्ता पत्नी रविन्द्र गुप्ता उन गिने-चुने लोगों में शामिल है, जिनमें न तो दहेज की कोई लालसा है और न ही शगुन लेने की। आशु गुप्ता के जुड़वां बेटे हुए थे। उन्होंने अपने दोनों बेटों के विवाह सादगी से लुधियाना के गोविंद गौधाम में सम्पन्न करवाए। बड़े बेटे आदित्य गुप्ता (चार्टर्ड अकाऊंटैंट) का विवाह उन्होंने सोनम के साथ 3 मार्च 2014 को किया था। ठाकुर जी के दरबार में सम्पन्न हुए विवाह में पूरी रस्में अदा हुईं। आशु ने कहा कि गौधाम एक पवित्र स्थान है जहां अपने बेटों के विवाह करके उन्हें मानसिक तौर पर काफी संतोष मिला है
उन्होंने बताया कि पहले उनकी इच्छा अपने बेटों के विवाह वृंदावन में करने की थी परंतु बाद में उन्होंने गौधाम का चयन किया। बड़े बेटे की शादी के समय तो लड़की वालों ने पैलेस भी बुक कर लिया था, जिसे बाद में रद्द करवाया गया। आशु गुप्ता ने कहा कि छोटे बेटे अनुभव गुप्ता (चार्टर्ड अकाऊंटैंट) का विवाह उन्होंने 10 मार्च 2016 को नितिका (मुस्कान) के साथ गोविंद गौधाम लुधियाना में ही सम्पन्न करवाया है। शादी के समय लड़की वालों से न तो शगुन लिया गया और न ही दहेज। बारातियों से भी शगुन की वसूली नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि वह चाहते थीं कि विवाह के बाद जो लड़की उनके घर में आए वह बहू बनकर नहीं बल्कि बेटी बनकर रहे। अगर वह दहेज स्वीकार करती तो फिर बहू को बेटी नहीं बनाया जा सकता था। उन्होंने कहा कि शगुन व दहेज रहित शादी से अब दोनों बेटों की पत्नियां घर में पूरी तरह से घुल-मिल गई हैं। उनके मनों में हमारे परिवार के प्रति सम्मान बढ़ा है। आशु गुप्ता ने कहा कि बड़े बेटे की जब गौधाम में शादी की गई थी तो वहां पहला विवाह सम्पन्न हुआ था। उसके बाद लगभग 12 लोगों ने गौधाम में विवाह सम्पन्न करवाया। उन्होंने कहा कि दहेज रहित शादी करके उन्हें परमात्मा का आशीर्वाद मिला है तथा मन को काफी सुकून व शांति मिल रही है। सकारात्मक ऊर्जा घरों में देखी जा रही है। घर दुख व क्लेश से रहित है।

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