बाल मजदूरी – जबरन या मजबूरी


शहर के मुख्य चौराहों पर तकरीबन रोज ही गरीब नन्हे बच्चे कुछ पैसे कमाने के लिए लोगों से भीख मांगते एवं चौंक पर खड़ी गाड़ियों पर कपड़े से सफाई करते हुए दिखाई दे जाते है जिन्हें कभी कोई कुछ पैसे देकर जाता है तो कोई इन्हे फटकार लगाते हुए आगे बढ़ जाता है पर यह बच्चे आगे आने वाली गाड़ी पर अपना ध्यान देतें है| वैसे तो बाल मजदूरी गैरकानूनी है पर क्या सरकार इन नन्हे बच्चों को उनकी मिलने वाली सुविधायें प्रदान करेगी जिससे वह आगे कभी अपना पेट भरने के लिए इस तरह मजदूरी करने पर विवश ना हों| वहीं दूसरी तरफ हर शहर में भिखारीयों का गिरोह सरगर्म है जिनका काम बच्चों से भीख मंगवाना और उन्हें पनाह देना होता है|

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