जाने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कहां होगा आधार का शेयर करना जरूरी और कहां नहीं


Aadhaaar

सुप्रीम कोर्ट ने आज आधार कार्ड की अनिवार्यता और नंबर शेयर करने की कन्फ्यूजन को दूर कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने आधार मामले में सुनवाई करते हुए इसे संवैधनिक दर्जा तो दिया. लेकिन, निजी कंपनियों को इसकी जानकारी देने से इनकार कर दिया. कोर्ट के आदेश के मुताबिक, अब आधार नंबर को हर किसी के साथ शेयर करने की अनिवार्यता नहीं होगी. कोर्ट ने अपने आदेश में यह साफ किया कि आधार नंबर कहां शेयर करना जरूरी है और कहां नहीं. सुप्रीम कोर्ट के आदेश से सबसे बड़ी राहत मोबाइल उपभोक्ताओं को दी है. क्योंकि, अब मोबाइल सिम लेने के लिए आधार नंबर शेयर करने या आधार कार्ड देने की जरूरत नहीं होगी.

कहां शेयर करना है और कहां नहीं – सिर्फ इन कामों के लिए शेयर करें

  • पैन कार्ड बनवाने के लिए आधार कार्ड जरूरी होगा. इसके बाद आधार को पैन कार्ड से लिंक भी कराना होगा. लिंक कराने का फायदा वित्तीय स्थितियों में लाभ के लिए मिलेगा.
  • आयकर रिटर्न भरने के लिए भी आधार नंबर की डिटेल्स फाइल करनी होगी. इसके लिए आधार का पैन से लिंक होना जरूरी है.
  •  सरकार की तरफ से दी जाने वाली लाभकारी योजनाओं में आधार जरूरी होगा. साथ ही सब्सिडी आधारित योजनाओं में सब्सिडी का लाभ लेने के लिए भी आधार अनिवार्य होगा.

कहां शेयर करना जरूरी नहीं

  •  मोबाइल सिम लेने के लिए किसी भी टेलीकॉम ऑपरेटर या रिटेलर को आधार देने की जरूरत नहीं होगी. कंपनियां आपसे आधार नहीं मांग सकेंगी.
  • मोबाइल वॉलेट के केवाईसी के लिए भी अब आधार देने की जरूरत नहीं होगी. यहां भी आधार की अनिवार्यता को खत्म कर दिया गया है.
  • किसी भी बैंक भी अकाउंट खोलने के लिए आधार कार्ड या नंबर शेयर करने की जरूरत नहीं होगी.
  •  स्कूल एडमिशन के वक्त बच्चे का आधार नंबर शेयर करना जरूरी नहीं होगा.
  • CBSE, नीट और UGC की परीक्षाओं के लिए भी आधार जरूरी नहीं होगा.
  • 14 साल से कम उम्र के बच्चों को आधार नहीं होने पर सरकार की ओर से दी जाने वाली जरूरी सेवाओं से वंचित नहीं किया जा सकता.
  • म्युचुअल फंड, शेयर मार्केट के केवाईसी के लिए भी आधार कार्ड देने की अनिवार्यता को खत्म कर दिया गया है.

आधार एक्ट का सेक्शन-57 रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को आधार एक्ट के सेक्शन 57 को रद्द कर दिया है. यह एक्ट प्राइवेट कंपनियों के साथ डेटा साझा करने की इजाजत देता है. 5 जजों की बेंच ने कहा है कि आधार संवैधानिक रूप से वैध है. कोर्ट के फैसले का मतलब है कि टेलीकॉम कंपनियां, ई-कॉमर्स कंपनियां, प्राइवेट बैंक और दूसरी ऐसी कंपनियां सर्विसेज के लिए ग्राहकों से बायोमैट्रिक और दूसरे डेटा नहीं मांग सकेंगी.

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