लुधियाना के बैंकों का 10 हजार करोड़ NPA वसूल होने की जगी उम्मीद


लुधियाना – भारतीय अर्थव्यवस्था की शक्ति माने जाने वाले बैंक इस दौर में विकट परिस्थितियों से गुजर रहे हैं। हाल ही में क्रिसिल द्वारा कराए सर्वे में सामने आया है कि देश के बैंकों को 10.3 लाख करोड़ रुपए के नॉन परफार्मिंग एसेट (एनपीए) की चपत लग चुकी है जोकि टोटल बैंकिंग लोन का 11.2 फीसदी है। देश का मैनचेस्टर कहलाने वाला लुधियाना भी इससे अछूता नहीं है। लुधियाना 10 हजार करोड़ रुपए के एनपीए के साथ दिल्ली के बाद नॉर्थ इंडिया का दूसरा आैर पंजाब का नंबर वन शहर बन गया है। सोमवार को देश के 22 पब्लिक सेक्टर बैंक, 19 प्राइवेट बैंक, 32 विदेशी बैंकों, एलआईसी आदि फाइनेंशियल संगठनों में इंटर क्रेडिटर समझौता (आईसीए) होने से लुधियाना में 10 हजार करोड़ रुपए की वसूली होने की उम्मीद जग गई है। इस बात की पुष्टि लीड बैंक के मैनेजर एसपी सिंह ने की है। उन्होंने माना कि जिला लुधियाना के बैंकों का एनपीए 10 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है। अब इस समझौते के बाद डिफॉल्टरों से वसूली करना आसान हो जाएगा।

50 करोड़ से अधिक एनपीए वालों की सीबीआई जांच के आदेश

हालांकि बैंकों में तेजी से बढ़ रहे एनपीए से घबरा फाइनेंस मंत्रालय जनवरी में बैंकों को 50 करोड़ रुपए से अधिक एनपीए वालों की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। फिर भी बैंक ऐसा करने से कतरा रहे हैं। इसका फायदा उठा बड़े डिफॉल्टरों ने अरबों रुपया विदेश भेज दिया। ऐसे में बैंकों के लिए वसूली करना नामुमकिन हो गया था। अब आईसीए पर सहमति बन जाने के बाद एनपीए की राह में आने वाली दिक्कतें दूर हो जाएंगी।

क्या है इंटर क्रेडिटर समझौता (आईसीए)

हर कंपनी ने कई बैंकों से लोन ले रखा होता है। आईसीए के तहत अब सारे बैंक मिलकर एक साथ रिकवरी प्रोसेस शुरू करेंगे। जिस बैंक का हिस्सा 66 फीसदी होगा, उसे अथाॅरिटी होगी कि वह डिफाॅल्टर के साथ कैसे सेटलमेंट करता है। जिन बैंकोंं का हिस्सा रह जाएगा, वे अपनी टोटल अमाउंट का 85 फीसदी हिस्सा लेकर दूसरे बैंकों को बेच सकेंगे। इस समझौते से कंपनी मालिकों को भी फायदा होगा, क्योंकि उन्हें अब बैंकों की परमिशन लेकर अपनी प्रॉपटी बेचने का अधिकार भी होगा।

बैंक और लोन लेने वाले दोनों हैं एनपीए के लिए जिम्मेवार

स्टेट बैंक आॅफ पटियाला से रिटार्यड विजिलेंस अफसर सुरिंदर गुप्ता का कहना है कि एनपीए के लिए बैंक और लोन लेने वाले दोनों

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